अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को दावा किया कि उसने ईरान के खिलाफ “रक्षात्मक कार्रवाई” करते हुए 4 ड्रोन मार गिराए और एक अन्य ड्रोन के लॉन्च ठिकाने पर हमला किया। इस घटना को इस हफ्ते में दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है।
अमेरिका का दावा: ड्रोन से था खतरा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की ओर से कुछ संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां देखी गईं, जिन्हें अमेरिका ने खतरनाक माना। दावा किया गया है कि ये ड्रोन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ क्षेत्र के लिए खतरा बन सकते थे।
इसी कारण अमेरिकी सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 4 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया और एक ऐसे सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया, जहां से पांचवां ड्रोन लॉन्च होने की तैयारी चल रही थी।
‘रक्षात्मक कार्रवाई’ का दावा
अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई को “डिफेंसिव स्ट्राइक” यानी रक्षात्मक हमला बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी बड़े खतरे को रोकने के लिए उठाया गया था, न कि किसी नए युद्ध को शुरू करने के उद्देश्य से।
यह भी बताया गया है कि पिछले कुछ दिनों में ईरानी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसके बाद यह कदम जरूरी माना गया।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय “कमजोर स्थिति में बातचीत” कर रहा है और अमेरिका को इसका फायदा उठाना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौते को लेकर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बनी हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंता
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका का दावा है कि ईरान की गतिविधियों से इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।
इसी कारण अमेरिका इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य खतरे को गंभीरता से ले रहा है।
संभावित समझौते पर चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते पर भी चर्चा चल रही है, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना है। हालांकि अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर समझौता होता है तो इससे लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
राजनीतिक दबाव भी बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका में राजनीतिक माहौल भी गर्म है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर और विपक्षी नेताओं की ओर से सरकार की ईरान नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से तनाव और बढ़ सकता है।
वहीं, दूसरी ओर, महंगाई और ऊर्जा कीमतों को लेकर भी अमेरिका में घरेलू दबाव बढ़ रहा है, जो आगामी राजनीतिक हालात को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन मौजूदा हालात में स्थिरता अभी दूर नजर आ रही है।

