Assam में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने गुरुवार को बड़ी सफलता हासिल की। विभाग ने भूमि अभिलेख विभाग के एडिशनल डायरेक्टर Lachit Kumar Das को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अधिकारी पर जमीन से जुड़े एक मामले में एनओसी (No Objection Certificate) जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने सतर्कता विभाग को जानकारी दी थी कि आरोपी अधिकारी जमीन की बिक्री अनुमति जारी करने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, इसलिए उसने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से संपर्क कर कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की प्रारंभिक जांच और सत्यापन किया, जिसमें आरोप सही पाए गए।
इसके बाद सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गुवाहाटी के रूपनगर स्थित भूमि अभिलेख निदेशालय में ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। कार्रवाई के दौरान अधिकारी को उसके कार्यालय में 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह रकम कुल मांगी गई रिश्वत का पहला हिस्सा थी।
छापेमारी के दौरान रिश्वत की रकम आरोपी अधिकारी के कब्जे से बरामद की गई। पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की गई और नकदी को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया। इसके तुरंत बाद आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।
सतर्कता विभाग ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 संशोधित) की धारा 7(a) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
Guwahati में हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। आम लोगों का कहना है कि जमीन और राजस्व विभागों में रिश्वतखोरी लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
सतर्कता विभाग ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है तो तुरंत इसकी शिकायत करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त संदेश है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब एजेंसियां अधिक सक्रिय और सतर्क हो चुकी हैं। आने वाले समय में ऐसे और भी अभियान चलाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर किया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

