United States और Israel द्वारा हाल में ईरान के खिलाफ किए गए सैन्य अभियानों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मिसाइल हमलों से इजरायल की सुरक्षा करने के दौरान अमेरिका ने अपने एडवांस एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम THAAD के लगभग आधे इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर लिए। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई है, जिसने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा के लिए 200 से अधिक THAAD इंटरसेप्टर दागे। यह संख्या पेंटागन के कुल THAAD स्टॉक का करीब आधा हिस्सा मानी जा रही है। THAAD यानी “Terminal High Altitude Area Defense” अमेरिका का अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा सिस्टम है, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम को दुनिया के सबसे प्रभावी मिसाइल डिफेंस प्लेटफॉर्म में गिना जाता है।
इतना ही नहीं, पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात अमेरिकी नौसेना के जहाजों से भी 100 से ज्यादा स्टैंडर्ड मिसाइल-3 और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 इंटरसेप्टर दागे गए। इनका इस्तेमाल ईरान और उसके समर्थक गुटों द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए किया गया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल की तुलना में लगभग दोगुनी संख्या में इंटरसेप्टर दागे। जहां अमेरिका ने 200 से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए, वहीं इजरायल ने 100 से कम Arrow इंटरसेप्टर और करीब 90 David’s Sling मिसाइल डिफेंस सिस्टम का उपयोग किया। इनमें से कई इंटरसेप्टर का इस्तेमाल लेबनान और यमन में सक्रिय ईरान समर्थित गुटों की ओर से दागे गए प्रोजेक्टाइल को रोकने के लिए भी किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर इंटरसेप्टर इस्तेमाल के बाद अमेरिका के सामने अपने रक्षा भंडार को दोबारा मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो सकती है। यदि भविष्य में ईरान और इजरायल के बीच फिर से संघर्ष बढ़ता है, तो अमेरिका को और अधिक मिसाइल रक्षा संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और हालात दोबारा बिगड़ सकते हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इस दौरान ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। जवाब में ईरान ने भी पश्चिम एशिया में अमेरिकी सहयोगियों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। हालांकि, अप्रैल 2026 में लागू युद्धविराम के बाद फिलहाल संघर्ष थम गया है।
अब दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस प्रयास पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि मध्य-पूर्व में स्थिरता वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

