भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर 96.90 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में जारी इस कमजोरी ने निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है।
लगातार आठवें दिन गिरा रुपया
मंगलवार को भी रुपया लगातार आठवें कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ था। भारतीय मुद्रा 50 पैसे टूटकर 96.70 प्रति डॉलर के ऑल टाइम लो स्तर पर बंद हुई थी।
अब बुधवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 96.89 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद 96.90 तक गिर गया।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह बन रही है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 99.26 के स्तर पर बना हुआ है।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, डॉलर इंडेक्स छह हफ्तों के उच्चतम स्तर के आसपास पहुंच चुका है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।
कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव आता है।
शेयर बाजार में भी गिरावट
रुपये की कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। बुधवार को बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 517 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ा रही है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2,457 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने शांति की शर्तें नहीं मानीं तो अमेरिका अगले कुछ दिनों में फिर से हमले शुरू कर सकता है।
इस बयान के बाद वैश्विक निवेशकों में डर बढ़ा है और सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग तेज हुई है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विदेशी सामान महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा की लागत भी बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
भारतीय रुपये में जारी गिरावट फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने घरेलू मुद्रा को कमजोर कर दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

