नरेंद्र मोदी ने बुधवार को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का संदेश दिया। प्रधानमंत्री करीब 55 मिनट तक मंदिर परिसर में रहे, जहां उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और मां गंगा को नमन किया। इस दौरान मंदिर परिसर “हर हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के गर्भगृह में लगभग सात से आठ मिनट तक विशेष पूजा की। उन्होंने भगवान शिव के साथ-साथ माता अन्नपूर्णा, भारत माता और आदि शंकराचार्य को भी प्रणाम किया। लंबे समय बाद उनकी यह यात्रा खास मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले वह जून 2024 में यहां दर्शन करने पहुंचे थे। इस बार उनकी मौजूदगी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
मंदिर दर्शन के बाद पीएम मोदी गंगा द्वार तक गए, जहां उन्होंने हाल ही में स्थापित वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। यह घड़ी पारंपरिक भारतीय समय गणना पद्धति को दर्शाती है और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ घाट पर लगे आधुनिक एयर प्यूरीफायर सिस्टम का भी निरीक्षण किया। यह सिस्टम खासतौर पर मणिकर्णिका घाट के आसपास की वायु को शुद्ध करने के लिए लगाया गया है। प्रधानमंत्री ने इस तकनीक के कामकाज को समझा और संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
मंदिर प्रशासन ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री को विशेष उपहार भी भेंट किए। उन्हें गुलाबी मीनाकारी से बना काशी विश्वनाथ मंदिर का एक सुंदर मॉडल दिया गया। इसके साथ ही भगवान विश्वनाथ को अर्पित किया जाने वाला शाल, जिस पर “जय विश्वनाथ” लिखा था और जिसमें रुद्राक्ष की मालाएं लगी थीं, भेंट किया गया। इसके अलावा भगवान शिव के प्रतीक त्रिशूल और डमरू भी उन्हें प्रदान किए गए।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में एक भव्य रोड शो भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रोड शो बनारस लोकोमोटिव वर्क्स से शुरू होकर शहर के कई प्रमुख इलाकों—लहरतारा, कचहरी, आंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबाग, लहुराबीर और मैदागिन—से होते हुए काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचा। इस दौरान सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया। उन्होंने हाथ हिलाकर और नमस्कार कर लोगों का धन्यवाद जताया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ विकास और आधुनिक तकनीक के समन्वय को भी दर्शाती है। काशी विश्वनाथ धाम में किए गए विकास कार्यों और सुविधाओं का निरीक्षण कर उन्होंने यह संकेत दिया कि परंपरा और आधुनिकता को साथ लेकर चलना ही देश की प्रगति का रास्ता है।

