एटीएफ की बढ़ती कीमतों से एयरलाइंस संकट में, 11% उत्पाद शुल्क हटाने की मांग, उड़ानें ठप होने की आशंका
नई दिल्ली: देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियों ने विमान ईंधन (एयर टर्बाइन फ्यूल-ATF) की लगातार बढ़ती कीमतों और रुपये में गिरावट के चलते गंभीर आर्थिक दबाव का सामना करने की चेतावनी दी है। एयरलाइंस ने सरकार से ATF पर लगने वाले 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से स्थगित करने की मांग की है, ताकि बढ़ती परिचालन लागत को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA), जिसमें एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइन कंपनियां शामिल हैं, ने नागर विमानन मंत्रालय को एक पत्र लिखकर तत्काल राहत की मांग की है। संगठन ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में एयरलाइन उद्योग अत्यधिक दबाव में है और यदि जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया तो उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है।
बढ़ती लागत और वैश्विक कारणों से बढ़ा दबाव
एयरलाइंस का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर ATF की कीमतों पर पड़ा है। इसके अलावा, कई देशों में एयर स्पेस प्रतिबंधों के कारण उड़ानों का रूट लंबा हो गया है, जिससे परिचालन लागत और बढ़ गई है।
FIA के अनुसार, एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन यानी ATF पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनियों के वित्तीय संतुलन को बिगाड़ देती है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में असंतुलन का मुद्दा
एयरलाइंस ने यह भी आरोप लगाया है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बीच असमान मूल्य निर्धारण प्रणाली के कारण भी उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि दोनों के लिए एक समान मूल्य निर्धारण व्यवस्था लागू की जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा संतुलित बनी रहे।
एयरलाइंस की चेतावनी: उड़ानें रुकने की स्थिति बन सकती है
FIA ने अपने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ATF की कीमतों और टैक्स संरचना में तत्काल राहत नहीं दी गई, तो एयरलाइंस को अपने परिचालन को सीमित करना पड़ सकता है। संगठन ने कहा है कि “यदि मौजूदा स्थिति जारी रही, तो कई उड़ानों को रद्द करना पड़ सकता है और कुछ विमानों को ग्राउंड करना भी पड़ सकता है।”
एयरलाइंस ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा पिछले महीने घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों में वृद्धि को 15 रुपये प्रति लीटर तक सीमित किया गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए यह बढ़ोतरी 73 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है।
उद्योग में संभावित संकट की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में स्थिरता नहीं आती और टैक्स में राहत नहीं मिलती, तो भारतीय विमानन उद्योग गंभीर संकट की ओर बढ़ सकता है। इससे न केवल एयरलाइंस प्रभावित होंगी, बल्कि यात्रियों को भी टिकट महंगे होने और उड़ानें कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
एटीएफ की बढ़ती कीमतें और करों का बोझ भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एयरलाइंस की मांग है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर 11% उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से हटाए और ईंधन कीमतों में राहत प्रदान करे, ताकि देश में हवाई यात्रा सुचारु रूप से जारी रह सके।

