अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) से लदा एक टैंकर सुरक्षित रूप से Strait of Hormuz पार कर चुका है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘मुबाराज़’ नाम का यह जहाज हाल ही में भारत के समुद्री क्षेत्र के पास देखा गया है। Mubarez नामक यह टैंकर संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा कंपनी Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के दास द्वीप स्थित संयंत्र से एलएनजी लेकर रवाना हुआ था। मार्च में क्षेत्र में तनाव बढ़ने और सैन्य गतिविधियों के चलते यह जहाज खाड़ी क्षेत्र में ही फंसा हुआ था और 31 मार्च के बाद से इसका सिग्नल भी बंद हो गया था।
हालांकि, अब इस जहाज का दोबारा ट्रैक होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में हालात कुछ हद तक सामान्य हो रहे हैं। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर एशिया की ओर बढ़ रहा है और मई के पहले सप्ताह तक अपने गंतव्य के करीब पहुंच सकता है। इससे भारत समेत एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति को लेकर राहत की उम्मीद जगी है।
India जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए एलएनजी की आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। एलएनजी यानी Liquefied Natural Gas, प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर तरल रूप में परिवर्तित किया जाता है, जिससे उसका आयतन कम हो जाता है और उसे आसानी से जहाजों के जरिए लंबी दूरी तक पहुंचाया जा सकता है। यह ऊर्जा उत्पादन, उद्योगों और गैस आधारित बुनियादी ढांचे के लिए एक अहम संसाधन है।
दरअसल, Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के चलते Strait of Hormuz पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
बताया जा रहा है कि इस तनाव के दौरान ईरान ने इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी, जबकि अमेरिका की ओर से भी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई थीं। ऐसे में कई जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े या वे खाड़ी क्षेत्र में ही रुके रहे।
‘मुबाराज़’ टैंकर का सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील मार्ग को पार करना न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह उम्मीद जगी है कि अगर युद्धविराम की स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है और किसी भी समय तनाव फिर से बढ़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण बेहद जरूरी हो गया है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम भारत के लिए एक राहत भरी खबर है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी बनी हुई है।

