वैश्विक अनिश्चितताओं और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। सोमवार को वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की तेजी दर्ज की गई, हालांकि बाजार पर दबाव अभी भी बना हुआ है।
Multi Commodity Exchange (एमसीएक्स) पर सुबह के कारोबार में सोने की कीमत में मामूली बढ़त देखी गई। 5 जून 2026 डिलीवरी वाले अनुबंध के लिए सोना पिछले सत्र के मुकाबले 0.01 प्रतिशत बढ़कर 1,52,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत में अपेक्षाकृत अधिक तेजी दर्ज की गई। 5 मई 2026 डिलीवरी के लिए चांदी 0.18 प्रतिशत बढ़कर 2,45,065 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
देश के प्रमुख महानगरों में सोने के हाजिर भाव में हल्का अंतर देखने को मिला। Delhi में 24 कैरेट सोना लगभग 15,457 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट 14,170 रुपये और 18 कैरेट सोना 11,587 रुपये प्रति ग्राम पर दर्ज किया गया। वहीं Mumbai, Kolkata और Bengaluru में कीमतें लगभग समान रहीं, जहां 24 कैरेट सोना करीब 15,442 रुपये प्रति ग्राम के आसपास रहा। दूसरी ओर Chennai में सोने के दाम थोड़ा अधिक देखे गए, जहां 24 कैरेट सोना 15,524 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार को सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती गिरावट के बाद सोना फिर से मजबूत हुआ और 4,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर के ऊपर पहुंच गया। यह तेजी उस समय आई जब खबरें सामने आईं कि ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें Strait of Hormuz को फिर से खोलने और तनाव कम करने की बात कही गई है।
हालांकि, इस सकारात्मक संकेत के बावजूद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। इसका सीधा असर केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं या फिर और सख्ती कर सकते हैं।
उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे निवेशक अन्य बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि हालिया तेजी के बावजूद सोने पर दबाव बना हुआ है।
कुल मिलाकर, मौजूदा समय में सोने का बाजार वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और बाजार के संकेतों को ध्यान से समझने का है, क्योंकि आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

