अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर हालात गंभीर होते नजर आ रहे हैं। शांति वार्ता की संभावनाओं के बीच ईरान ने ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। ईरान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि हाल ही में हुए 40 दिनों के संघर्ष के दौरान उसने अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसकी मिसाइल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सुरक्षित है।
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रेजा तलाई-निक ने शनिवार को कहा कि युद्ध के दौरान ईरानी सेना ने रणनीतिक रूप से संयम बरता। उन्होंने बताया कि देश के पास अभी भी उन्नत और लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा जखीरा मौजूद है, जिसका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किया जा सकता है। इस बयान ने अमेरिका और इजरायल दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान के मिसाइल सिस्टम और सैन्य ढांचे को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। लेकिन ईरान के इस ताजा बयान ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान का कहना है कि उसने जानबूझकर अपनी पूरी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि भविष्य की रणनीति मजबूत बनी रहे।
ईरान के अनुसार, युद्ध के दौरान उसकी सेना ने दुश्मन के कब्जे वाले इलाकों के आसमान पर भी नियंत्रण बनाए रखा। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सीजफायर लागू होने से ठीक पहले तक ईरानी रक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय थी और किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम थी। इस बयान को ईरान की ताकत का प्रदर्शन माना जा रहा है।
इस बीच रूस ने भी कुछ दिन पहले संकेत दिया था कि ईरान के पास ऐसी मिसाइल तकनीक हो सकती है, जिसके बारे में दुनिया को पूरी जानकारी नहीं है। अब ईरान के इस दावे ने रूस की बात को और मजबूती दी है। माना जा रहा है कि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को काफी गुप्त रखा है और यही उसकी रणनीतिक ताकत है।
हालांकि, इन सबके बीच अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन ऐसे बयानों से तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
मिडिल ईस्ट में पहले ही हालात नाजुक हैं और ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य बयानबाजी वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती है। ईरान का यह दावा न केवल उसकी ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

