23 Apr 2026, Thu

Bhooth Bangla review: डर कम, ठहाके ज्यादा, अक्षय को मिला असरानी-परेश और राजपाल का सहारा, खिंची कहानी लेकिन लबालब कॉमेडी

भूत बंगला
स्टार रेटिंग: 3/5 | रिलीज डेट: 17 अप्रैल 2026 | डायरेक्टर: प्रियदर्शन

कॉमेडी के उस्ताद प्रियदर्शन और सुपरस्टार अक्षय कुमार की जोड़ी एक बार फिर फिल्म ‘भूत बंगला’ के साथ बड़े पर्दे पर लौटी है। ‘हेरा फेरी’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी यादगार फिल्मों के बाद दर्शकों को इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं। हालांकि, यह फिल्म पूरी तरह उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, लेकिन फिर भी मनोरंजन के कई हल्के-फुल्के पल जरूर देती है।

फिल्म की कहानी मंगलपुर नाम के एक काल्पनिक गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां ‘वधुसुर’ नामक एक रहस्यमयी राक्षस का आतंक है। कहानी में मोड़ तब आता है जब लंदन में रहने वाला अर्जुन (अक्षय कुमार) अपने परिवार के साथ गांव लौटता है और एक पुश्तैनी महल में अपनी बहन की शादी करने का फैसला करता है। इस महल से जुड़े रहस्य, लोककथाएं और डरावनी घटनाएं फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाती हैं।

फिल्म का पहला हाफ इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यहां प्रियदर्शन का सिग्नेचर कॉमिक स्टाइल साफ नजर आता है। सिचुएशनल कॉमेडी, तेज रफ्तार संवाद और कलाकारों की शानदार टाइमिंग दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहती है। अक्षय कुमार के साथ परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी की तिकड़ी स्क्रीन पर पुरानी यादें ताजा कर देती है।

हालांकि, जैसे-जैसे फिल्म दूसरे हाफ में प्रवेश करती है, इसकी पकड़ कमजोर पड़ने लगती है। कहानी अचानक कॉमेडी से गंभीर हॉरर-थ्रिलर की ओर मुड़ती है, लेकिन यह बदलाव प्रभावी नहीं लगता। पटकथा में गहराई की कमी और बार-बार आने वाले फ्लैशबैक फिल्म को खींचा हुआ और बोझिल बना देते हैं। लगभग 2 घंटे 45 मिनट की लंबाई भी दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है।

अभिनय की बात करें तो अक्षय कुमार अपनी कॉमिक टाइमिंग से एक बार फिर प्रभावित करते हैं, लेकिन उनके किरदार में नया पन कम नजर आता है। परेश रावल और राजपाल यादव छोटे-छोटे दृश्यों में भी जान डाल देते हैं। वहीं, तब्बू जैसी दमदार अभिनेत्री का फिल्म में सही उपयोग नहीं हो पाया, जो निराश करता है।

तकनीकी पक्ष औसत है। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है और गांव व महल के दृश्य प्रभावी लगते हैं, लेकिन हॉरर एलिमेंट्स कमजोर पड़ जाते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक में डर का प्रभाव नहीं बन पाता और वीएफएक्स भी खास असर नहीं छोड़ते।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कन्फ्यूज टोन है। यह तय नहीं कर पाती कि इसे हॉरर बनना है या सिर्फ कॉमेडी। क्लाइमेक्स भी काफी प्रेडिक्टेबल है, जो दर्शकों को चौंकाने में असफल रहता है।

कुल मिलाकर, ‘भूत बंगला’ एक हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म है, जो अपने पहले हाफ और कलाकारों की केमिस्ट्री के दम पर एक बार देखी जा सकती है। अगर आप गहरी कहानी और मजबूत हॉरर की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो निराशा हो सकती है, लेकिन सिर्फ हंसी-मजाक के लिए यह फिल्म ठीक-ठाक विकल्प साबित होती है।

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