वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है। रेटिंग एजेंसी S&P Global की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का भारत की आर्थिक वृद्धि पर सीमित असर पड़ेगा और देश की स्थिति कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक स्थिर बनी रहेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अगर कच्चे तेल की कीमतें औसतन 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती हैं, तब भी भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। एजेंसी का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते निवेश और लगातार चल रहे आर्थिक सुधारों की वजह से दबावों को बेहतर तरीके से झेल सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में उपभोग (डिमांड) आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण बाहरी झटकों का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खपत बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में तेजी भी ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार प्रभावित हो सकता है।
इसके बावजूद, S&P Global का मानना है कि भारत की स्थिति कई अन्य उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर रहेगी। मजबूत आर्थिक आधार और नीतिगत स्थिरता के कारण भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भले ही वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहे, लेकिन भारत की आर्थिक वृद्धि की गति स्थिर और सकारात्मक रहने की उम्मीद है, जो आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में ला सकती है।

