13 Jun 2026, Sat

भारत के कार बाजार में मारुति सुजुकी की पकड़ ढीली, 13 साल के निचले स्तर पर पहुंचा मार्केट शेयर

ऑटो सेक्टर में दबाव: मारुति सुजुकी का मार्केट शेयर 13 साल के निचले स्तर पर, बढ़ती प्रतिस्पर्धा बनी बड़ी चुनौती

भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में वर्षों तक दबदबा बनाए रखने वाली Maruti Suzuki अब गंभीर प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का मार्केट शेयर घटकर 39.26% पर आ गया है, जो पिछले 13 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते उपभोक्ता रुझानों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत भी देती है।

कभी देश के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली मारुति सुजुकी लगातार तीसरे साल गिरावट दर्ज कर रही है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, FY20 के बाद से कंपनी करीब 12% बाजार हिस्सेदारी खो चुकी है। यह तब हो रहा है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बन चुका है और नए-नए खिलाड़ी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह SUV सेगमेंट में कंपनी की कमजोर पकड़ मानी जा रही है। वर्तमान में भारत के कुल कार बाजार में SUV की हिस्सेदारी लगभग 67% तक पहुंच चुकी है, लेकिन इस सेगमेंट में मारुति की हिस्सेदारी 25% से भी कम है। कंपनी ने हाल के वर्षों में Maruti Suzuki Grand Vitara और Maruti Suzuki Jimny जैसे मॉडल लॉन्च किए, लेकिन ये बाजार में उतना प्रभाव नहीं डाल पाए जितना प्रतिस्पर्धियों के मॉडल कर रहे हैं।

मारुति की दूसरी बड़ी चुनौती उसकी छोटे कार सेगमेंट पर अधिक निर्भरता है। Maruti Suzuki Wagon R, Maruti Suzuki Swift और Maruti Suzuki Baleno जैसी कारें लंबे समय से कंपनी की रीढ़ रही हैं। इस सेगमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 67% है, लेकिन FY26 में इसकी वृद्धि दर 2% से भी कम रही, जो कंपनी के लिए चिंता का विषय है।

वहीं दूसरी ओर, प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने तेजी से अपनी स्थिति मजबूत की है। Mahindra & Mahindra ने SUV सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर 14.21% कर लिया है। Tata Motors भी करीब 13% हिस्सेदारी के साथ मारुति के करीब पहुंच चुकी है। Mahindra Thar, Mahindra Scorpio, Tata Nexon और Tata Punch जैसे मॉडल ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

इसके अलावा, ब्रांड इमेज और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी मारुति को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के पास फिलहाल डीजल इंजन का पोर्टफोलियो नहीं है, जबकि बाजार में अब भी लगभग 20% हिस्सेदारी डीजल वाहनों की है। वहीं, Toyota के साथ साझेदारी के तहत आने वाले री-बैज्ड मॉडल कई बार मारुति के अपने उत्पादों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे कंपनी की प्रीमियम ब्रांड छवि प्रभावित हो रही है।

हालांकि, कंपनी ने FY31 तक फिर से 50% मार्केट शेयर हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, लेकिन मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए यह लक्ष्य आसान नहीं दिखता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मारुति को अपनी खोई हुई स्थिति वापस पाना है, तो उसे SUV सेगमेंट में आक्रामक रणनीति अपनाने के साथ-साथ नई तकनीकों और प्रीमियम सेगमेंट पर भी ध्यान देना होगा।

कुल मिलाकर, भारत के तेजी से बदलते ऑटो बाजार में मारुति सुजुकी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खुद को नए दौर के हिसाब से ढालने की है।

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