16 Apr 2026, Thu

Toaster Movie Review: नया आइडिया, हल्कि कॉमेडी और अजीब सस्पेंस, कैसी है राजकुमार और सान्या की ‘टोस्टर’?

Toaster Film Review: राजकुमार राव की डार्क कॉमेडी नेटफ्लिक्स पर हुई रिलीज, जानें कैसी है फिल्म

नेटफ्लिक्स की नई डार्क कॉमेडी फिल्म “Toaster” रिलीज हो चुकी है, जिसमें मुख्य भूमिकाओं में राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा नजर आ रहे हैं। यह फिल्म एक बेहद अनोखे और अजीब कॉन्सेप्ट पर आधारित है, जिसमें एक साधारण घरेलू चीज “टोस्टर” पूरी कहानी का केंद्र बन जाती है। फिल्म का निर्देशन विवेक दासचौधरी ने किया है और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix पर रिलीज किया गया है।

कहानी: एक टोस्टर से शुरू हुआ अपराध और अराजकता

फिल्म की कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बेहद कंजूस और हिसाब-किताब रखने वाला इंसान है। वह हर छोटे खर्च को लेकर परेशान रहता है और यहां तक कि गिफ्ट में दिए गए पैसे भी वापस मांग लेता है।

कहानी तब मोड़ लेती है जब वह एक शादी में दिए गए अपने टोस्टर को वापस लेने की जिद पकड़ लेता है, क्योंकि वह कपल अब अलग हो चुका होता है। लेकिन यही टोस्टर धीरे-धीरे एक हत्या के मामले से जुड़ जाता है और रमाकांत की जिंदगी पूरी तरह उलझ जाती है।

घबराहट में वह टोस्टर को छिपाने की कोशिश करता है, लेकिन हालात और बिगड़ते जाते हैं। इसके बाद कहानी में कई किरदार जुड़ते हैं और एक अराजक, डार्क और सिचुएशनल कॉमेडी का माहौल बनता है, जहां हर कदम पर कुछ न कुछ गलत होता जाता है।

अभिनय: दमदार पर सीमित स्क्रीन स्पेस

राजकुमार राव ने एक बार फिर साबित किया है कि वह किरदारों में जान डालने वाले अभिनेता हैं। उन्होंने रमाकांत के अजीब, चिड़चिड़े और कंजूस स्वभाव को बेहद प्रभावी तरीके से निभाया है।

सान्या मल्होत्रा का किरदार अच्छा है, लेकिन उन्हें स्क्रीन पर सीमित अवसर मिला है, जिससे उनका प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है। वहीं अर्चना पूरन सिंह, सीमा पाहवा और अभिषेक बनर्जी अपने छोटे लेकिन प्रभावशाली रोल में कहानी को मजबूती देते हैं।

निर्देशन: आइडिया अच्छा, लेकिन रफ्तार कमजोर

निर्देशक विवेक दासचौधरी ने एक बेहद अलग और क्रिएटिव आइडिया को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। फिल्म की शुरुआत काफी दिलचस्प और मजेदार होती है, लेकिन बीच में इसकी रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

कई सीन जरूरत से ज्यादा खींचे हुए लगते हैं और कहानी अपनी शुरुआती पकड़ खो देती है। हालांकि डार्क ह्यूमर के कुछ हिस्से काफी प्रभावी और मनोरंजक हैं।

क्या है खास और क्या नहीं

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका अनोखा कॉन्सेप्ट और डार्क कॉमेडी का ट्रीटमेंट है। जब कहानी अपने मूल हास्य पर टिकती है, तो यह काफी एंटरटेनिंग लगती है।

हालांकि कमजोर एडिटिंग, धीमी गति और कन्फ्यूजिंग क्लाइमैक्स फिल्म को थोड़ा कमजोर बनाते हैं।

निष्कर्ष

“Toaster” एक अलग तरह की डार्क कॉमेडी है, जो हर किसी के लिए नहीं है। लेकिन अगर आप अनोखी और अजीब कहानियां पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक है। यह पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, लेकिन अपनी अलग पहचान जरूर बनाती है।

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