Strait of Hormuz को लेकर ईरान-अमेरिका तनाव के बीच एक बड़ी और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग में कई स्थानों पर समुद्री बारूदी सुरंगें (नौसैनिक माइंस) बिछा दी थीं, लेकिन अब कथित तौर पर उसे उनकी सटीक लोकेशन का पता नहीं है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया जा रहा है कि ये खदानें इतनी बेतरतीब तरीके से बिछाई गई थीं कि न तो उनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया और न ही उनके स्थान को ठीक से मैप किया गया। अब स्थिति यह है कि अमेरिकी सैटेलाइट सिस्टम और खुफिया एजेंसियां भी इन खतरनाक सुरंगों की सही लोकेशन ट्रैक करने में असमर्थ हैं।
इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की समुद्री खदानें वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डाल सकती हैं और ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल का कारण बन सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हाल के संघर्ष के दौरान ईरान ने छोटी नावों के जरिए तेजी से इस क्षेत्र में खदानें बिछाईं, ताकि संभावित सैन्य दबाव की स्थिति में इस मार्ग को बाधित किया जा सके। हालांकि, अब यह आशंका जताई जा रही है कि इन खदानों का एक हिस्सा बहाव के कारण अपनी जगह से हट भी सकता है, जिससे स्थिति और अधिक अनियंत्रित हो गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के पास इन खदानों को सुरक्षित तरीके से हटाने की क्षमता सीमित है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह के ऑपरेशन को बेहद जटिल और जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे क्षेत्र पर कड़ी नजर रख रही हैं।
इस बीच ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुख रूप से चर्चा में आ गया है। अमेरिका का दबाव है कि Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखा जाए, ताकि तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रहे। वहीं ईरान की ओर से इसे “तकनीकी चुनौती” बताते हुए समाधान निकालने की बात कही गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजार पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस रणनीतिक जलमार्ग और ईरान-अमेरिका वार्ता के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

