Noida International Airport से उड़ानों की शुरुआत को लेकर लंबे समय से चला आ रहा इंतजार अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए यह एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े एविएशन प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है, लेकिन तमाम तैयारियों के बावजूद कमर्शियल फ्लाइट्स की शुरुआत अभी तक तय नहीं हो पाई है। रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग और बुनियादी ढांचा लगभग पूरी तरह तैयार होने के बाद भी कुछ प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें इसकी शुरुआत में देरी का कारण बन रही हैं।
हाल ही में एयरपोर्ट का उद्घाटन हो चुका है और एयरोड्रम लाइसेंस भी मिल गया है, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि जल्द ही यहां से उड़ानें शुरू हो जाएंगी। लेकिन संचालन से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हो सकी हैं। खासकर एयरलाइंस के फ्लाइट शेड्यूल, टिकट बुकिंग और सुरक्षा से जुड़े अंतिम अप्रूवल को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
इसी बीच 20 अप्रैल को होने वाली एक हाई-लेवल बोर्ड बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (यापल) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक के दौरान एयरपोर्ट साइट का निरीक्षण भी किया जाएगा, ताकि ग्राउंड लेवल पर तैयारियों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा विदेशी सीईओ की नियुक्ति और उससे जुड़ी सुरक्षा मंजूरी का है। कुछ तकनीकी और प्रशासनिक आपत्तियों के कारण यह प्रक्रिया अटकी हुई है, जिसे बैठक में सुलझाने की कोशिश की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का समाधान हो जाता है, तो एयरपोर्ट के संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकता है।
इसके अलावा तीन प्रमुख एयरलाइंस के साथ पहले ही समझौता (MOU) हो चुका है। यानी एयरलाइंस तैयार हैं, बस उन्हें आधिकारिक रूप से उड़ान शेड्यूल जारी करने और टिकट बुकिंग शुरू करने की हरी झंडी का इंतजार है। जैसे ही प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी, एयरलाइंस अपनी सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर देंगी।
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि 20 अप्रैल की बैठक इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर सभी अड़चनें दूर हो जाती हैं, तो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक यहां से पहली कमर्शियल फ्लाइट उड़ान भर सकती है।
दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए यह एयरपोर्ट न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल सभी की नजरें 20 अप्रैल की अहम बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि उड़ानों का इंतजार और कितना लंबा चलेगा।

