30 करोड़ साल पुराने ‘ऑक्टोपस’ की पहचान बदली, अब निकला नौटिलस का रिश्तेदार
वैज्ञानिकों द्वारा जिसे अब तक दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस माना जा रहा था, वह जीव वास्तव में कुछ और ही निकला है। करीब 30 करोड़ साल पुराने इस समुद्री जीव Pohlsepia mazonensis को पहले ऑक्टोपस के रूप में पहचाना गया था, लेकिन नई रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह जीवाश्म अमेरिका के इलिनॉयस राज्य के माजोन क्रीक इलाके में खोजा गया था, जो अपने प्राचीन जीवाश्मों के लिए जाना जाता है। साल 2000 में इसे ऑक्टोपस घोषित किया गया था और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में ‘सबसे पुराने ऑक्टोपस’ के रूप में दर्ज किया गया।
इस खोज ने यह धारणा मजबूत की थी कि ऑक्टोपस की उत्पत्ति बहुत पहले हो चुकी थी। लेकिन बाद में जब और गहराई से अध्ययन किया गया, तो वैज्ञानिकों को इस पर संदेह होने लगा।
नई रिसर्च में क्या खुलासा हुआ?
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के जूलॉजिस्ट Thomas Clements के नेतृत्व में की गई नई रिसर्च में इस फॉसिल का आधुनिक तकनीक से अध्ययन किया गया।
वैज्ञानिकों ने “सिंक्रोट्रॉन” नामक तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें बहुत शक्तिशाली एक्स-रे जैसी रोशनी से फॉसिल के अंदर की संरचना को देखा जाता है। इस जांच के दौरान एक अहम चीज सामने आई—रैड्युला (दांतों की संरचना)।
दांतों ने खोला राज
इस जीव के दांतों की संरचना ऑक्टोपस से मेल नहीं खाती थी।
- ऑक्टोपस में आमतौर पर 7–9 दांत होते हैं
- जबकि इस जीव में 11 दांतों की पंक्ति पाई गई
इस अंतर से यह साफ हो गया कि यह ऑक्टोपस नहीं हो सकता। इसके बजाय, यह एक ऐसे समूह से जुड़ा पाया गया जो नौटिलस (Nautilus) जैसे खोल वाले समुद्री जीवों का रिश्तेदार है।
क्यों हुई गलती?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह फॉसिल सड़ने के दौरान अपना खोल खो बैठा था, जिससे इसकी असली पहचान समझना मुश्किल हो गया। इसी वजह से इसे गलत तरीके से ऑक्टोपस माना गया।
गिनीज रिकॉर्ड से हटेगा नाम
इस नई खोज के बाद Guinness World Records ने भी माना है कि अब ‘सबसे पुराने ऑक्टोपस’ का रिकॉर्ड हटाया जाएगा। संगठन के अनुसार, अब नए वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इस रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी।
नई पहचान से क्या मिला?
हालांकि यह खोज पहले की मान्यता को बदल देती है, लेकिन इससे म्यूजियम या वैज्ञानिकों को निराश होने की जरूरत नहीं है। अब यह जीवाश्म “दुनिया का सबसे पुराना सॉफ्ट-टिश्यू नौटिलस” का एक अनोखा उदाहरण बन गया है।
निष्कर्ष
यह मामला बताता है कि विज्ञान हमेशा बदलता और विकसित होता रहता है। नई तकनीकों और शोध के जरिए पुरानी मान्यताएं बदल सकती हैं। Pohlsepia mazonensis की कहानी यह साबित करती है कि एक छोटी-सी खोज भी हमारे इतिहास और जीवों के बारे में समझ को पूरी तरह बदल सकती है।

