31 Oct 2026, Sat
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चीन ने ईरान की सेना को मदद देने की बात से किया इनकार, सफाई में कही बड़ी बात

चीन ने ईरान को खुफिया जानकारी देने के दावों को किया खारिज, रक्षा मंत्रालय ने दी सफाई

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में हुए अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर के बाद कई तरह की चर्चाएं सामने आईं, जिनमें यह दावा किया गया कि चीन ने ईरान को अमेरिकी सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी दी है। हालांकि, चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि उसने ईरान की सेना को किसी भी प्रकार की खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, खासकर अमेरिका से जुड़ी सैन्य गतिविधियों या लोकेशन के बारे में। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन के खिलाफ अटकलों और झूठी जानकारी फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका वह कड़ा विरोध करता है।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि चीन ईरान से जुड़े मुद्दों पर हमेशा एक संतुलित और तटस्थ रुख अपनाता रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं है, जिससे किसी भी प्रकार का संघर्ष बढ़ सकता हो या क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा हो।

यह विवाद तब सामने आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चीन की कुछ निजी कंपनियां, जिनमें कुछ का संबंध पीपल्स लिबरेशन आर्मी से बताया गया है, युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी बेच रही थीं। इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए राजी करने में अहम भूमिका निभाई है। ट्रंप के अनुसार, सीजफायर की दिशा में चीन का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इधर, पाकिस्तान भी इस सीजफायर का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग देशों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ऐसे दावे और बयान अक्सर कूटनीतिक तनाव को बढ़ा देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरें वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन और देशों के बीच विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में देशों द्वारा दिए गए आधिकारिक बयानों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

फिलहाल, चीन ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की सैन्य खुफिया साझेदारी या हस्तक्षेप में शामिल नहीं है और अपनी तटस्थ नीति पर कायम है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे स्थिति और स्पष्ट होगी।

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