एंग्लो-जांजीबार युद्ध: दुनिया का सबसे छोटा युद्ध, जो सिर्फ 45 मिनट में खत्म हो गया
इतिहास में कई लंबे और विनाशकारी युद्ध दर्ज हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो बेहद कम समय में समाप्त हो गए। ऐसा ही एक ऐतिहासिक युद्ध है एंग्लो-जांजीबार युद्ध (Anglo-Zanzibar War), जिसे दुनिया का सबसे छोटा युद्ध माना जाता है। यह युद्ध 27 अगस्त 1896 को लड़ा गया था और मात्र 40 से 45 मिनट के भीतर समाप्त हो गया।
यह युद्ध ब्रिटेन और जांजीबार सल्तनत के बीच हुआ था, जो आज के तंजानिया का हिस्सा है। उस समय जांजीबार में सत्ता को लेकर विवाद चल रहा था। ब्रिटिश समर्थक सुल्तान हमद बिन थुवैनी के निधन के बाद खालिद बिन बरघाश ने बिना ब्रिटिश मंजूरी के सत्ता संभाल ली थी। ब्रिटेन को यह कदम मंजूर नहीं था और उन्होंने इसे चुनौती दी।
ब्रिटिश सरकार ने सुल्तान खालिद को पद छोड़ने का अल्टीमेटम दिया, जिसमें उन्हें सुबह 9 बजे तक सत्ता छोड़ने का समय दिया गया था। लेकिन सुल्तान ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद 9:02 बजे ब्रिटिश नौसेना ने जांजीबार के महल पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी।
ब्रिटिश सेना की ताकत के सामने जांजीबार की सेना बेहद कमजोर साबित हुई। यह युद्ध पूरी तरह से एकतरफा था, जिसमें ब्रिटिश युद्धपोतों ने महल और आसपास के इलाकों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस संघर्ष में लगभग 500 लोग मारे गए या घायल हो गए, जबकि ब्रिटिश पक्ष से केवल एक नाविक घायल हुआ।
युद्ध के दौरान सुल्तान खालिद बिन बरघाश का महल और उनकी शाही नौका एचएचएस ग्लासगो पूरी तरह तबाह हो गई। लगातार हमलों के कारण सुबह 9:40 या 9:45 बजे तक सुल्तान का झंडा गिर गया और युद्ध समाप्त घोषित कर दिया गया। इस तरह यह युद्ध मात्र 45 मिनट में खत्म हो गया, जो विश्व इतिहास में अब तक का सबसे छोटा युद्ध माना जाता है।
एंग्लो-जांजीबार युद्ध यह दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक विवाद और सत्ता संघर्ष कभी-कभी छोटे लेकिन निर्णायक युद्धों का रूप ले सकते हैं। यह घटना आज भी इतिहास के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है।
आज के समय में, जब दुनिया कई बड़े और लंबे संघर्षों से जूझ रही है, जैसे आधुनिक युद्ध और क्षेत्रीय तनाव, यह छोटा सा युद्ध हमें याद दिलाता है कि कुछ संघर्ष कितनी जल्दी और निर्णायक रूप से समाप्त हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, एंग्लो-जांजीबार युद्ध इतिहास का एक अनोखा और चौंकाने वाला अध्याय है, जो अपनी बेहद छोटी अवधि और भारी परिणामों के कारण हमेशा याद किया जाता रहेगा।

