10 Jun 2026, Wed

पूर्व सीएम उमा भारती ने रोड पर पोहा और जलेबी बेचा, दुकानदारों का किया समर्थन, प्रशासन ने हटाई थी कई दुकानें

उमा भारती का अनोखा विरोध: टीकमगढ़ में सड़क किनारे खुद बेचा पोहा-जलेबी, गरीब दुकानदारों का समर्थन

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Uma Bharti एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज और जनता के प्रति संवेदनशीलता को लेकर सुर्खियों में हैं। टीकमगढ़ में मंगलवार सुबह उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे सड़क किनारे खुद हाथ-ठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेचती नजर आईं। इस दौरान उन्होंने स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध किया और छोटे दुकानदारों के समर्थन में खुलकर सामने आईं।

जानकारी के अनुसार, उमा भारती ने सोमवार को नगर पालिका, एसडीएम और तहसीलदार की टीम द्वारा सिविल लाइन रोड पर चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर नाराजगी जताई थी। इस अभियान के दौरान कई छोटे दुकानदारों और हाथठेलों को जेसीबी की मदद से हटा दिया गया था, जिससे कई गरीब परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया था।

इसी कार्रवाई के विरोध में उमा भारती मंगलवार सुबह खुद सिविल लाइन रोड पर पहुंचीं और एक हाथ-ठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने न सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से यह कदम उठाया, बल्कि हटाए गए दुकानदारों को वापस बुलाकर फिर से अपने ठेले लगाने के लिए प्रेरित किया। उनका उद्देश्य प्रशासन को यह संदेश देना था कि गरीबों की आजीविका को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

उमा भारती ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि पहले छोटे दुकानदारों के लिए उचित स्थान चिन्हित किया जाना चाहिए और उसके बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पार्षदों ने पहले ही तीन-चार स्थान सुझाए थे, जहां इन दुकानदारों को व्यवस्थित किया जा सकता है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को हटाना गलत है।

उन्होंने हटाए गए दुकानदारों से अपील की कि वे वापस आकर अपनी दुकानें फिर से लगाएं और भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ खड़ी हैं। उमा भारती ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगी कि इन ठेले वालों को दोबारा वहां से नहीं हटाया जाए। उनका यह कदम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि उमा भारती बेहद सहजता से पोहा-जलेबी बेच रही हैं और आम लोगों से बातचीत कर रही हैं। उनका यह कदम न केवल एक विरोध का तरीका था, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक कार्रवाई करते समय गरीबों के हितों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

जब उनसे इस मामले में प्रशासन से बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी इस कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन वे जल्द ही अधिकारियों से बात करेंगी। उन्होंने दोहराया कि सभी हटाए गए ठेले वापस उसी स्थान पर लगाए जाएंगे।

उमा भारती का यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर जहां उनके समर्थक इसे गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई और जनहित के बीच संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देती है।

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