6 Apr 2026, Mon

जयप्रकाश एसोसिएट्स अधिग्रहण मामले में वेदांता को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश में हस्तक्षेप करने से किया इनकार

Jaiprakash Associates Deal Case: सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT को दी सुनवाई की जिम्मेदारी, वेदांता-अडाणी के बीच जारी रहेगा विवाद

Jaiprakash Associates Limited (Jaiprakash Associates Limited) के अधिग्रहण से जुड़े बड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और दोनों पक्षों—वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) और अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Limited)—को अपने तर्क और प्रतिदावे NCLAT के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।

यह पूरा मामला Adani Group और Vedanta Limited के बीच Jaiprakash Associates के अधिग्रहण को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा से जुड़ा हुआ है। NCLAT ने अडाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली के आधार पर कंपनी के अधिग्रहण को रोकने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वेदांता ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि Jaiprakash Associates की निगरानी समिति (Monitoring Committee) किसी भी बड़े नीतिगत फैसले को लेने से पहले NCLAT की अनुमति लेगी। कोर्ट ने यह कदम कंपनी के हितों और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए एक सुरक्षा उपाय के रूप में उठाया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि चूंकि NCLAT में इस मामले की अंतिम सुनवाई 10 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली है, इसलिए इस समय किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुनवाई उसी दिन पूरी नहीं होती है, तो इसे अगले कार्य दिवस पर जारी रखा जाना चाहिए, ताकि मामले का शीघ्र निपटारा हो सके।

वेदांता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने कोर्ट में दलील पेश की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी की बोली सबसे अधिक है और इससे लेनदारों को अधिक लाभ मिलेगा। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि उनकी समाधान योजना के तहत लेनदारों को करीब 17,926 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जो कि अन्य बोली की तुलना में अधिक है। उन्होंने अडाणी ग्रुप की 14,000 करोड़ रुपये की बोली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे लेनदारों को कम फायदा हो सकता है।

दूसरी ओर, अडाणी ग्रुप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अन्य कानूनी विशेषज्ञों ने अपनी दलीलें पेश कीं। वहीं, ऋणदाताओं की समिति (Committee of Creditors) का पक्ष सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने रखा। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों को मजबूत तरीके से अदालत के सामने रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस चरण पर वह NCLAT के आदेश में कोई बदलाव नहीं करेगा, क्योंकि मामला पहले ही अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। कोर्ट ने यह भी माना कि अपीलकर्ता वेदांता के हितों की पर्याप्त सुरक्षा की गई है, इसलिए अतिरिक्त निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

इस मामले में अब सभी की नजरें NCLAT की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जो 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। यह सुनवाई Jaiprakash Associates के भविष्य और इसके अधिग्रहण को लेकर निर्णायक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल कॉरपोरेट जगत के लिए बल्कि भारतीय इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के लिए भी एक अहम उदाहरण बन सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि NCLAT इस हाई-प्रोफाइल केस में क्या फैसला देता है और किस कंपनी के पक्ष में यह बड़ा कॉरपोरेट अधिग्रहण जाता है।

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