असम चुनाव से पहले सियासी घमासान: हिमंत सरमा और कांग्रेस आमने-सामने, पत्नी के पासपोर्ट विवाद पर FIR
असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से ठीक पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बीच हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस पार्टी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। विवाद का केंद्र मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़ा कथित पासपोर्ट मामला बन गया है।
कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास एक से अधिक देशों के पासपोर्ट हैं, जो भारतीय कानून के खिलाफ है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनकी पत्नी के पास भारत के अलावा अन्य देशों के भी वैध पासपोर्ट हैं और यह दोहरी नागरिकता के नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि विदेश में कंपनियों और संपत्तियों में निवेश को लेकर जानकारी छुपाई गई है।
इस मामले में गौरव गोगोई और पवन खेड़ा जैसे नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि अगर ये दस्तावेज सही हैं तो यह गंभीर कानूनी मामला बनता है और इसकी जांच होनी चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि ये आरोप पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस ने यह जानकारी एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से हासिल की है और जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, वे फोटोशॉप किए गए हैं।
हिमंत सरमा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर असम चुनाव को लेकर असामान्य रूप से चर्चा बढ़ी है और कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी का हिस्सा लगती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसियां जांच करेंगी।
इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए आरोप लगाने पर भारतीय कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगाना गंभीर अपराध है।
इस मुद्दे पर सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोपों को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के आधार पर आरोप लगा रही है और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है और लगातार जवाब मांग रही है। पार्टी का कहना है कि वह मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े सभी मामलों को सार्वजनिक करेगी और अगर सत्ता में आई तो जांच कराएगी।
कुल मिलाकर, चुनाव से ठीक पहले यह विवाद असम की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और इसका चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ता है।

