7 Apr 2026, Tue

सोने-चांदी के दाम इस हफ्ते घटेंगे या बढ़ेंगे? खरीदारी से पहले जान लें विश्लेषकों की राय

भू-राजनीतिक तनाव से चमका सोना-चांदी, निवेशकों की नजर अब अहम आर्थिक आंकड़ों पर

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में कीमती धातुओं की दिशा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का रुख कायम रहा। कॉमेक्स पर जून डिलीवरी वाला सोना करीब 155.4 डॉलर यानी 3.43% की बढ़त के साथ 4,679.7 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं चांदी भी पीछे नहीं रही और मई डिलीवरी वाली चांदी 3.13 डॉलर यानी 4.5% की तेजी के साथ 72.92 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।

घरेलू बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर जून डिलीवरी वाला सोना 2,425 रुपये यानी 1.65% मजबूत हुआ, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी में 4,541 रुपये यानी 2% की बढ़त दर्ज की गई। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब इससे पहले लगातार तीन हफ्तों तक गिरावट देखी गई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के पीछे कई कारण हैं। भारतीय रुपये का कमजोर होना, बिटकॉइन में गिरावट और निवेशकों का सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव प्रमुख वजहों में शामिल हैं। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक अक्सर सोने-चांदी को सुरक्षित विकल्प के रूप में चुनते हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की नजर अब कई महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका के बेरोजगारी दर, जॉबलेस क्लेम्स, जीडीपी, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) इंडेक्स और उपभोक्ता महंगाई (CPI) के आंकड़े शामिल हैं। ये सभी आंकड़े आगे चलकर वैश्विक मौद्रिक नीति और कमोडिटी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

भारत में भी निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की आने वाली मौद्रिक नीति पर रहेगी। आरबीआई के फैसले से ब्याज दरों और निवेश धारणा पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने-चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिलेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक, बेहतर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर बनी हुई है और मौजूदा मौद्रिक नीति अभी भी सहायक है। हालांकि बीच में ईटीएफ निवेशकों की बिकवाली और केंद्रीय बैंकों की खरीद में कमी से कुछ दबाव जरूर देखने को मिला।

इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में फिर तेजी आई। ईरान द्वारा शांति प्रस्ताव को ठुकराना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने का रुख भी बाजार की चिंता को बढ़ा रहा है।

इसके अलावा, चीन में चांदी की मांग में भी तेजी देखी जा रही है। साल 2026 के शुरुआती दो महीनों में चीन का चांदी आयात 206.76 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो पिछले आठ वर्षों का उच्चतम स्तर है। इससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन मजबूत भौतिक मांग और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने और चांदी की कीमतों में निकट भविष्य में सीमित दायरे में रहते हुए हल्की तेजी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

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