27 Mar 2026, Fri

Explainer: हॉर्मुज रूट से निकलना जहाजों के लिए आसान क्यों नहीं? जानें, क्या है ईरान की सेना का रोल

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराया संकट

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चलते इस अहम समुद्री मार्ग पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर कड़ी निगरानी और आंशिक नाकेबंदी जैसे कदम उठाए हैं, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जिसके जरिए वैश्विक तेल और LNG का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अनुमान के मुताबिक, दुनिया की लगभग 20 से 25 प्रतिशत तेल आपूर्ति, यानी करीब 20 से 21 मिलियन बैरल प्रतिदिन, इसी मार्ग से होकर जाती है। इस वजह से इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की “लाइफलाइन” भी कहा जाता है।

वर्तमान स्थिति में ईरान ने इस जलमार्ग पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) इस पूरे क्षेत्र में नियंत्रण बनाए हुए है और जहाजों की आवाजाही पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिना अनुमति प्रवेश करने वाले कई जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिससे शिपिंग कंपनियों में दहशत का माहौल है।

इस जलमार्ग की भौगोलिक स्थिति भी इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। इसकी कुल चौड़ाई लगभग 30 किलोमीटर है, जबकि सबसे संकरा हिस्सा 3 किलोमीटर से भी कम है। यहां से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी समुद्री सीमा के बेहद करीब से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे ईरान को उनकी गतिविधियों पर पूरी निगरानी रखने का मौका मिलता है।

तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट देखी गई है। पहले जहां रोजाना 135 से 140 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 5-6 जहाज प्रतिदिन रह गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च महीने में केवल 138 जहाज ही इस मार्ग का उपयोग कर पाए, जो पहले की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। इस स्थिति के कारण लगभग 2000 जहाज इस क्षेत्र के आसपास सुरक्षित मार्ग का इंतजार कर रहे हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, इराक, बहरीन और ईरान जैसे देशों से तेल और गैस का निर्यात होता है। इसके सबसे बड़े खरीदारों में भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। अकेले भारत अपनी करीब 40 प्रतिशत कच्चे तेल और लगभग 54 प्रतिशत LNG का आयात इसी मार्ग से करता है। ऐसे में इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूल रहा है और सुरक्षित मार्ग देने के लिए लाखों डॉलर की मांग की जा रही है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है। इस पूरे मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए IRGC की ओर से जहाजों की गहन जांच की जाती है, जिसमें उनके दस्तावेज, माल, मालिकाना हक और गंतव्य की पूरी जानकारी शामिल होती है।

विशेष अनुमति मिलने के बाद ही जहाजों को विशेष कोड और दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। जैसे ही जहाज जलडमरूमध्य के पास पहुंचता है, उसकी पुष्टि VHF रेडियो के जरिए की जाती है और गश्ती नौकाएं उसे सुरक्षित रास्ते से निकालती हैं। पूरी प्रक्रिया IRGC की निगरानी में होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है। अमेरिका और NATO देशों द्वारा सीधे हस्तक्षेप से बचने के कारण भी स्थिति के जल्द सामान्य होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।

कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा संकट की ओर इशारा कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में दुनिया भर के बाजारों और देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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