3 Mar 2026, Tue

मिडिल ईस्ट टेंशन से स्टॉक मार्केट में खलबली! सेंसेक्स 914 अंक टूटा, निफ्टी 25000 से नीचे फिसला, ये बड़े स्टॉक्स धड़ाम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को घरेलू शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई और निवेशकों में सतर्कता का माहौल दिखाई दिया।

सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 914.15 अंकों की तेज गिरावट के साथ 80,373.04 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 246.40 अंक फिसलकर 24,932.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती सत्र में बिकवाली का दबाव लगभग सभी सेक्टरों में नजर आया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया।

ऑटो सेक्टर पर खास नजर
आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर के कई बड़े शेयर फोकस में हैं। इनमें मारुति सुजुकी इंडिया, हुंडई मोटर इंडिया, हीरो मोटोकॉर्प, आयशर मोटर्स, टाटा मोटर्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस मोटर कंपनी, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी जैसे स्टॉक्स शामिल हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर संभावित असर और तेल की कीमतों में उछाल का प्रभाव ऑटो कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है, जिससे इन शेयरों में उतार-चढ़ाव की आशंका है।

सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में
सोमवार को सभी प्रमुख सेक्टर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रियल्टी सेक्टर करीब 2% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। इसके अलावा एविएशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन, लार्सन एंड टूब्रो, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

हालांकि, बाजार में पूरी तरह निराशा का माहौल नहीं रहा। ONGC, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंडाल्को जैसे शेयरों में मजबूती देखी गई, जिन्हें आज के टॉप गेनर्स में गिना गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से ऊर्जा कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद के चलते इन शेयरों में खरीदारी देखी गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर दबाव
निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 1% की गिरावट के साथ कमजोर रुख में नजर आए। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे माहौल में निवेशक बड़े और सुरक्षित शेयरों की ओर रुख करते हैं, जिससे मिड और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ज्यादा दबाव बनता है।

रुपया भी कमजोर
शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 91.29 के स्तर पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेशकों की निकासी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

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