Pakistan-Afghanistan Conflict: बढ़ते तनाव के बीच इशाक डार ने तुर्की के विदेश मंत्री से की बातचीत
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री Ishaq Dar ने तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan से फोन पर बातचीत की है।
दोनों देशों के बीच यह संपर्क ऐसे समय में हुआ है जब सीमा पार हमलों और सैन्य कार्रवाई के दावों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के दावे
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने काबुल और कंधार में हवाई हमले किए हैं। वहीं अफगानिस्तान की ओर से कहा गया है कि उसने पाकिस्तान की करीब 15 सैन्य चौकियों पर कब्जा किया है और फैजाबाद क्षेत्र में भी कार्रवाई की है।
इन दावों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन सैन्य दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
तुर्की से कूटनीतिक संपर्क
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इशाक डार और हाकान फिदान के बीच टेलीफोन पर क्षेत्रीय घटनाक्रमों, विशेष रूप से पाकिस्तान-अफगानिस्तान हालात पर विस्तृत चर्चा हुई।
पाकिस्तानी पक्ष के मुताबिक, इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की “आक्रामकता” का जवाब दिया है और अपनी संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सैन्य कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तानी सेना ने “Operation Ghazb lil Haq” के तहत हवाई अभियान चलाए हैं।
शांति और स्थिरता पर जोर
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। तुर्की, जो इस्लामी देशों के बीच सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाता रहा है, ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और संवाद के जरिए समाधान खोजने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की से संपर्क पाकिस्तान की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत वह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
क्षेत्रीय असर की आशंका
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का असर पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया क्षेत्र पर पड़ सकता है। सीमा पर बढ़ती झड़पें न केवल सुरक्षा बल्कि मानवीय हालात को भी प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से आधिकारिक बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका अहम हो सकती है।
स्थिति पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और संयम के जरिए हालात को और बिगड़ने से रोका जा सकेगा।

