संभल जिले की रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा में बड़ी लापरवाही, केवल रस्से के सहारे यातायात नियंत्रित
संभल जिले की एक रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिल रही है। इस क्रॉसिंग पर न तो स्थायी फाटक है और न ही कोई गेटमैन तैनात है। रेलवे के कर्मचारी केवल एक रस्से का सहारा लेकर ट्रेन आने से पहले सड़क के दोनों ओर उसे बांध देते हैं और ट्रेन गुजरने तक वाहन और राहगीरों को खड़ा कर देते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ट्रेन आने से पहले यह अस्थायी व्यवस्था लागू की जाती है। सड़क पर खड़े लोग और वाहन पूरी तरह से इस अस्थायी रस्से पर निर्भर रहते हैं। ट्रेन गुजरने के बाद ही रस्सा हटाया जाता है, जिससे इस क्रॉसिंग पर हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार अफरातफरी की स्थिति भी बन चुकी है।
भारत में रेलवे ट्रैक पर विभागीय लापरवाही के कई उदाहरण समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यह अक्सर ट्रैक मेंटेनेंस की कमी, निरीक्षण में चूक, स्टाफ की कमी और संसाधनों के गलत उपयोग से जुड़े होते हैं। ऐसी खामियों को कई बार CAG (कॉम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट्स, हादसों की जांच और मीडिया रिपोर्ट्स में उजागर किया गया है। संभल की यह स्थिति इसी श्रृंखला में एक गंभीर उदाहरण बन गई है।
रेलवे ट्रैक सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होती है। फाटक और गेटमैन जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी न केवल आम जनता के लिए खतरा है, बल्कि बड़े हादसों की संभावना भी बढ़ाती है। इस क्रॉसिंग पर केवल रस्से के सहारे यातायात रोकने का तरीका न केवल असुरक्षित है, बल्कि यह रेलवे सुरक्षा मानकों के भी खिलाफ है।
स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से पक्का फाटक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे न केवल राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अफरातफरी जैसी स्थिति से बचा जा सकेगा। इसके अलावा, समय-समय पर गेटमैन की तैनाती और नियमित निरीक्षण भी आवश्यक हैं।
रेलवे विभाग पर यह चुनौती है कि वह जल्द से जल्द इस गंभीर लापरवाही को दूर करे और सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करे। जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो संभल जैसी जगहों पर दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहेगा।
यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सड़क पर खड़े लोग और वाहन केवल रस्से की मदद पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अस्थायी व्यवस्थाओं से गंभीर हादसे होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
सम्भल जिले की यह रेलवे क्रॉसिंग सुरक्षा की दृष्टि से एक चेतावनी है। अब देखने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं।

