जूट किसानों को बड़ी राहत: 2026-27 के लिए MSP बढ़कर ₹5925 प्रति क्विंटल
केंद्र सरकार ने जूट किसानों को राहत देते हुए 2026-27 विपणन सत्र के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹275 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹5925 कर दिया है। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट बैठक के बाद दी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और जूट उत्पादन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लिया गया है।
50% से अधिक लाभ का दावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MSP तय करने का आधार वही नीति है, जिसके तहत किसानों को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक मूल्य सुनिश्चित किया जाता है। इस बढ़ोतरी से जूट किसानों को लागत में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे जूट उत्पादक देशों में से एक है। पूर्वी राज्यों—विशेषकर West Bengal, Assam और Bihar—में लाखों किसान जूट की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में MSP में वृद्धि सीधे तौर पर इन राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।
2014 के बाद 2.5 गुना बढ़ा MSP
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में कच्चे जूट का MSP ₹2400 प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर ₹5925 हो गया है। यानी पिछले एक दशक में MSP में लगभग 2.5 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा, 2004-05 से 2013-14 के बीच जूट किसानों को कुल ₹441 करोड़ का MSP भुगतान किया गया था, जबकि 2014-15 से 2025-26 के बीच यह राशि बढ़कर ₹1,342 करोड़ हो गई है, जो लगभग तीन गुना ज्यादा है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार ने जूट क्षेत्र में खरीद और भुगतान की प्रक्रिया को मजबूत किया है।
खरीद की जिम्मेदारी JCI पर
सरकार ने बताया कि मूल्य समर्थन संचालन की जिम्मेदारी Jute Corporation of India (JCI) को सौंपी गई है। यदि बाजार में जूट की कीमतें MSP से नीचे जाती हैं, तो JCI किसानों से सीधे खरीद करेगी। इस प्रक्रिया में होने वाले किसी भी वित्तीय नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार करेगी।
इस व्यवस्था से किसानों को यह भरोसा मिलेगा कि बाजार में कीमत गिरने पर भी उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त होगा।
अन्य ग्रेड की कीमतें भी होंगी तय
कच्चे जूट के अन्य ग्रेड और किस्मों का MSP, TD-3 ग्रेड को आधार मानकर निर्धारित किया जाएगा। इससे पूरे जूट सेक्टर में मूल्य संतुलन बना रहेगा और विभिन्न गुणवत्ता के जूट उत्पादकों को भी समान लाभ मिलेगा।
किसानों और उद्योग के लिए मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाने में मदद करेगी। साथ ही, जूट उद्योग—जो पर्यावरण के अनुकूल और जैव-अपघटित उत्पादों के लिए जाना जाता है—को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्लास्टिक पर बढ़ती पाबंदियों के बीच जूट उत्पादों की मांग में इजाफा हो सकता है। ऐसे में यह निर्णय किसानों के साथ-साथ जूट उद्योग के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

