-20 डिग्री में कुत्ते को कंबल ओढ़ाया, डिलीवरी बॉय की चली गई नौकरी? रूस में पिज्जा चेन पर विवाद
रूस में एक डिलीवरी वर्कर को कथित तौर पर आवारा कुत्ते की मदद करने की वजह से नौकरी से निकाल दिए जाने का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह विवाद मशहूर पिज्जा चेन Dodo Pizza से जुड़ा है। हालांकि कंपनी का दावा है कि कर्मचारी को कुत्ते की मदद करने की वजह से नहीं, बल्कि उसके कार्य प्रदर्शन (परफॉर्मेंस) के आधार पर हटाया गया था।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना रूस के चेल्याबिंस्क शहर की है, जहां पिछले डेढ़ साल से एक आवारा कुत्ता ‘डोडोबोन्या’ नाम से स्थानीय आउटलेट के बाहर रहता था। वहां काम करने वाले कर्मचारी और ग्राहक उसे पहचानते थे और वह आउटलेट का अनौपचारिक मैस्कॉट जैसा बन गया था।
सर्दियों में जब तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था, तो कर्मचारी उसे ठंड से बचाने के लिए कंबल ओढ़ा देते थे। बताया जा रहा है कि नए मैनेजर के आने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। मैनेजर ने कर्मचारियों को चेतावनी दी कि अगर किसी ने कुत्ते को पनाह दी तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच मिखाइल (या मिकेल) नाम के एक डिलीवरी वर्कर ने कथित तौर पर कुत्ते को बर्फ में ठिठुरते देखा और उसे कंबल ओढ़ा दिया। इसके बाद उसकी नौकरी चली गई। कर्मचारी का दावा है कि उसे सिर्फ कुत्ते की मदद करने की वजह से निकाला गया।
कंपनी की सफाई
सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद Dodo Pizza ने आधिकारिक बयान जारी किया। कंपनी का कहना है कि कर्मचारी को कुत्ते की वजह से नहीं, बल्कि उसके परफॉर्मेंस से जुड़ी समस्याओं के कारण हटाया गया था।
कंपनी ने कहा कि कुत्ते की घटना से पहले ही उसके साथ अनुबंध खत्म करने की प्रक्रिया चल रही थी। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति विशेष के बारे में सार्वजनिक रूप से अधिक जानकारी साझा नहीं करेंगे।
सोशल मीडिया पर विरोध
जैसे ही यह खबर सामने आई कि कड़ाके की ठंड में कुत्ते को कंबल देने पर कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया, लोगों ने पिज्जा चेन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने कंपनी का बहिष्कार (बॉयकॉट) करने की मांग उठाई। डॉग लवर्स और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स का कहना है कि जानवरों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना सजा का कारण नहीं होना चाहिए।
मिखाइल ने कथित तौर पर मैनेजर द्वारा भेजे गए संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि जो भी कुत्ते की मदद करेगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।
संवेदनशीलता बनाम कंपनी नीति
यह मामला अब दो पक्षों में बंट चुका है—एक ओर वे लोग हैं जो इसे मानवीय संवेदना का मुद्दा मान रहे हैं, तो दूसरी ओर कंपनी अपनी आंतरिक नीतियों और कार्य प्रदर्शन का हवाला दे रही है।
फिलहाल, इस विवाद ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या कार्यस्थल पर मानवीय संवेदनाएं दिखाना गलत है? और क्या किसी कर्मचारी को जानवर की मदद करने पर नौकरी से निकालना उचित है?
यह घटना कॉर्पोरेट नीतियों और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

