3 May 2026, Sun

VIDEO: राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर कांपी धरती, गरजे वज्र और भीष्म, देखकर शहबाज-मुनीर को लगेगी मिर्ची

Jaisalmer सेक्टर में गरजे T-90 Bhishma और K-9 Vajra, ‘बैटल एक्स’ युद्धाभ्यास में दिखी मारक क्षमता

राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर के पास रेगिस्तान एक बार फिर भारतीय सेना की ताकत का गवाह बना। जैसलमेर सेक्टर के फॉरवर्ड इलाकों में आयोजित ‘बैटल एक्स’ युद्धाभ्यास के दौरान जब T-90 भीष्म टैंक और K-9 वज्र स्व-चालित तोपें गरजीं, तो मीलों दूर तक धरती कांप उठी। सटीक निशाना, तेज प्रतिक्रिया और आधुनिक तकनीक के दम पर सेना ने काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को पलभर में तबाह करने का प्रदर्शन किया।

यह अभ्यास भारतीय सेना की Indian Army की कोनार्क कोर (12 कोर) द्वारा किया जा रहा है, जिसका मुख्यालय जोधपुर में स्थित है। ‘बैटल एक्स’ डिवीजन अपनी आक्रामक क्षमता और दुश्मन की रक्षा पंक्ति को तोड़ने की विशेषज्ञता के लिए जानी जाती है।

रेगिस्तान में एकीकृत युद्धाभ्यास

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, रेगिस्तानी युद्ध में दूरी और दृश्यता बड़ी चुनौती होती है। ऐसे हालात में दुश्मन की हलचल का तुरंत पता लगाना और तेजी से जवाब देना बेहद जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से ‘सेंसर टू शूटर’ लिंक को परखा गया।

ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम से मिली जानकारी को कितनी तेजी से फायरिंग यूनिट तक पहुंचाया जाता है और कितनी सटीकता से टारगेट को नष्ट किया जाता है, इसका सफल परीक्षण इस अभ्यास में किया गया। दिन और रात दोनों समय काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाकर सेना ने अपनी तत्परता का प्रदर्शन किया।

T-90 भीष्म और K-9 वज्र की गर्जना

युद्धाभ्यास में भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक T-90 भीष्म ने अहम भूमिका निभाई। यह टैंक अपनी ताकत, गति और सटीकता के लिए जाना जाता है। वहीं K-9 वज्र स्व-चालित तोपों ने लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर अपनी क्षमता दिखाई।

रेगिस्तान की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये तोपें उच्च तापमान और कठिन भूभाग में भी प्रभावी फायरिंग करने में सक्षम हैं। अभ्यास के दौरान इंफेंट्री, आर्मर्ड (टैंक) और आर्टिलरी (तोपखाना) के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।

हर मौसम में तैयार भारतीय सेना

अभ्यास के दौरान जवानों ने यह भी दिखाया कि वे शून्य से नीचे के तापमान से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक की झुलसाने वाली गर्मी में भी अपनी मारक क्षमता बनाए रखने में सक्षम हैं। तेज रफ्तार, सटीक फायरिंग और तकनीकी समन्वय ने यह साबित किया कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए तैयार है।

कोनार्क कोर की ‘बैटल एक्स’ डिवीजन को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह दुश्मन की रक्षा पंक्ति को भेदने में माहिर मानी जाती है। इस अभ्यास ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रदर्शित किया है।

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