12 Feb 2026, Thu

अंडे अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं? इसका कारण जानकर हो जाएंगे हैरान

अगर आप अंडा खाते हैं तो आपने जरूर देखा होगा कि बाजार में दो तरह के अंडे मिलते हैं—सफेद और भूरे (देसी)। कई लोग मानते हैं कि भूरे अंडे ज्यादा पौष्टिक होते हैं, जबकि कुछ लोग सफेद अंडों को बेहतर समझते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर अंडों का रंग अलग-अलग क्यों होता है? इसके पीछे का कारण जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

हमारे देश में खाने-पीने की आदतों के आधार पर लोग अलग-अलग वर्गों में बंटे होते हैं—शुद्ध शाकाहारी, मांसाहारी और एगिटेरियन। एगिटेरियन वे लोग होते हैं जो खुद को शाकाहारी मानते हैं, लेकिन अंडा खाते हैं। ऐसे में अंडे से जुड़ी यह जानकारी उनके लिए खास हो सकती है।

अंडे के रंग का असली कारण

अंडे का रंग मुख्य रूप से मुर्गी के जेनेटिक्स (आनुवंशिक गुणों) पर निर्भर करता है। यानी मुर्गी की नस्ल तय करती है कि वह किस रंग का अंडा देगी। आमतौर पर जिन मुर्गियों के इयरलोब (कान के पास का हिस्सा) सफेद होते हैं, वे सफेद अंडे देती हैं। वहीं जिन मुर्गियों के इयरलोब लाल या भूरे रंग के होते हैं, वे भूरे अंडे देती हैं।

हालांकि यह कोई 100% पक्का नियम नहीं है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यही पैटर्न देखने को मिलता है। यही कारण है कि पोल्ट्री फार्म में अलग-अलग नस्लों की मुर्गियां अलग रंग के अंडे देती हैं।

क्या सभी अंडे शुरू में सफेद होते हैं?

दिलचस्प बात यह है कि सभी अंडों का मूल शेल कैल्शियम कार्बोनेट से बनता है, जो प्राकृतिक रूप से सफेद होता है। लेकिन अंडा बनने की प्रक्रिया के दौरान मुर्गी के शरीर में मौजूद पिगमेंट (रंग देने वाले तत्व) उसकी बाहरी परत पर चढ़ जाते हैं। इसी वजह से कुछ अंडे भूरे, कुछ हल्के क्रीम और कुछ सफेद दिखाई देते हैं।

यानी रंग केवल अंडे के बाहरी छिलके पर होता है। अंदर से लगभग सभी अंडे एक जैसे ही होते हैं।

क्या भूरे अंडे ज्यादा हेल्दी होते हैं?

अक्सर यह भ्रम रहता है कि भूरे या देसी अंडे ज्यादा पौष्टिक होते हैं। लेकिन वैज्ञानिक रूप से ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि रंग के आधार पर अंडों की पौष्टिकता बदलती है। अंडे की गुणवत्ता इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि मुर्गी को किस तरह का आहार दिया गया है और उसकी परवरिश कैसे हुई है।

भूरे अंडे अक्सर इसलिए महंगे होते हैं क्योंकि उन्हें देने वाली मुर्गियां आकार में बड़ी होती हैं और उन्हें अधिक चारा चाहिए होता है। उत्पादन लागत ज्यादा होने के कारण उनकी कीमत भी बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

अंडे का रंग सिर्फ मुर्गी की नस्ल और उसके जेनेटिक गुणों पर निर्भर करता है। सफेद और भूरे अंडों के स्वाद और पोषण में कोई बड़ा अंतर नहीं होता। अगली बार जब आप अंडा खरीदें, तो रंग देखकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। दोनों ही प्रकार के अंडे सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

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