11 Feb 2026, Wed

अमेरिका की धमकी के बीच ग्रीनलैंड पर कनाडा और फ्रांस का बड़ा कदम, ट्रंप को झटका

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार आक्रामक बयानबाजी के बीच फ्रांस और कनाडा ने बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। दोनों देशों ने शुक्रवार को ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में अपने-अपने कांसुलेट (वाणिज्य दूतावास) का उद्घाटन किया। इस कदम को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति एकजुटता के साथ-साथ अमेरिका की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के कारण वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा “अधिग्रहण” किए जाने की बात कह चुके हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया था।

कनाडा ने दिखाई खुली एकजुटता

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नुक में कनाडाई कांसुलेट का औपचारिक उद्घाटन किया। इस दौरान कनाडा का राष्ट्रीय ध्वज ‘मैपल लीफ’ फहराया गया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राष्ट्रगान ‘ओ कनाडा’ गाया।
अनीता आनंद ने कहा,
“आज इस कांसुलेट का उद्घाटन यह दर्शाता है कि कनाडा ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। यह आर्कटिक क्षेत्र में हमारी साझेदारी, नेतृत्व और मौजूदगी को और मजबूत करेगा।”

कनाडा ने वर्ष 2024 में ही ग्रीनलैंड में कांसुलेट खोलने की घोषणा कर दी थी, हालांकि खराब मौसम के चलते उद्घाटन में देरी हुई। कनाडा सरकार का कहना है कि यह फैसला ट्रंप के हालिया बयानों से पहले लिया गया था।

फ्रांस बना ईयू का पहला देश

वहीं, फ्रांस ने ग्रीनलैंड में महावाणिज्य दूतावास खोलने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बनकर इतिहास रच दिया है। फ्रांस की ओर से ज्यां-नोएल पोइरियर ने नुक में महावाणिज्य दूत के रूप में कार्यभार संभाला।
फ्रांस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय जून 2025 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ग्रीनलैंड यात्रा के दौरान लिया गया था। उस समय मैक्रों ने यूरोप की “एकजुटता” पर जोर देते हुए ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी महत्वाकांक्षाओं की खुलकर आलोचना की थी।

टैरिफ धमकियों से भी बढ़ा तनाव

गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में डेनमार्क सहित फ्रांस, जर्मनी, यूके, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड जैसे सात यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि जब तक ग्रीनलैंड को अमेरिका को “पूरी तरह बेच” नहीं दिया जाता, तब तक ये टैरिफ लगाए जाएंगे।

हालांकि, यूरोपीय संघ की एकजुटता के बाद ट्रंप को अपनी यह धमकी वापस लेनी पड़ी। पहले उन्होंने 1 फरवरी से 10% और 1 जून से 25% टैरिफ लगाने की बात कही थी, लेकिन बाद में दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में उन्होंने रुख नरम कर लिया।

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा और फ्रांस का यह कदम आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत है, जहां रूस और चीन भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। यह फैसला ग्रीनलैंड के निवासियों और डेनमार्क के लिए एक मजबूत समर्थन संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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