12 Feb 2026, Thu

बीजेपी को AIMIM का समर्थन, श्रीचंद तेजवानी बने मेयर; महाराष्ट्र से फिर सामने आई चौंकाने वाली सियासी तस्वीर

महाराष्ट्र के अमरावती महानगरपालिका के मेयर चुनाव में इस बार राजनीति के अप्रत्याशित समीकरण देखने को मिले। बीजेपी की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) की पार्षद मीरा कांबले ने चुनाव के ऐन वक्त पर बीजेपी उम्मीदवार श्रीचंद तेजवानी को समर्थन दिया। इस समर्थन के चलते बीजेपी के श्रीचंद तेजवानी अमरावती के मेयर निर्वाचित हो गए।

AIMIM पार्षद को पार्टी से निष्कासित

मीरा कांबले के इस कदम के बाद AIMIM ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी का कहना है कि यह फैसला AIMIM की विचारधारा और अनुशासन के खिलाफ था। AIMIM की ओर से साफ किया गया कि कोई भी सदस्य पार्टी की रणनीति के विपरीत निर्णय लेने की अनुमति नहीं रखता।

मेयर पद के साथ-साथ अमरावती में उपमहापौर का चुनाव भी हुआ। इस पद के लिए युवा स्वाभिमान पार्टी के सचिन भेंडे को चुना गया। इस तरह अमरावती महानगरपालिका में नई सत्ता संरचना का स्वरूप सामने आया।

महायुति की सत्ता और सत्ता-साझेदारी

अमरावती महानगरपालिका में अब महायुति की सत्ता स्थापित हो गई है। इस महायुति में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) और युवा स्वाभिमान पार्टी शामिल हैं।

सत्ता-साझेदारी के फार्मूले के तहत श्रीचंद तेजवानी पहले 1.5 वर्ष तक मेयर रहेंगे। इसके बाद बीजेपी के ही आशीष अतकरे अगले 1.5 वर्ष के लिए मेयर पद संभालेंगे। इस व्यवस्था से महायुति में स्थिरता और सहयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

राजनीतिक समीकरण और भविष्य

मीरा कांबले का बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देना इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक चौंकाने वाली घटना मानी जा रही है। इससे साबित होता है कि स्थानीय राजनीति में गठबंधन और व्यक्तिगत रणनीति का प्रभाव कितना महत्वपूर्ण होता है।

AIMIM के लिए यह कदम संकट का संकेत है क्योंकि पार्टी की नीतियों के खिलाफ चलना किसी सदस्य को महंगा पड़ सकता है। वहीं, बीजेपी और महायुति के लिए यह जीत स्थानीय सत्ता पर मजबूत पकड़ का संकेत है।

अमरावती में यह राजनीतिक घटनाक्रम भविष्य में स्थानीय और राज्यस्तरीय चुनावों पर भी प्रभाव डाल सकता है। पार्टी गठबंधन और सत्ता-साझेदारी की रणनीतियां अब और अधिक सतर्क और सक्रिय राजनीति की मांग करती हैं।

निष्कर्ष

अमरावती मेयर चुनाव में AIMIM पार्षद का बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन देना स्थानीय राजनीति के अप्रत्याशित मोड़ को दर्शाता है। इस घटना ने न केवल बीजेपी की जीत सुनिश्चित की, बल्कि स्थानीय राजनीतिक समीकरण को भी बदल दिया। महायुति की सत्ता, सत्ता-साझेदारी का फार्मूला और राजनीतिक रणनीतियां अब पूरे जिले की राजनीति में नए अध्याय खोलने जा रही हैं।

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