उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। भारत सिटी सोसाइटी में रहने वाली तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मौके से एक डायरी मिली है, जिसे सुसाइड नोट बताया जा रहा है। इस डायरी में लिखी बातों ने न केवल परिवार बल्कि समाज के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, तीनों बहनों ने आत्महत्या से पहले अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था। दरवाजा तोड़ने पर कमरे से एक डायरी बरामद हुई, जिसमें अंग्रेजी और हिंदी मिश्रित भाषा में सुसाइड नोट लिखा हुआ था। डायरी में बहनों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वे कोरियन कल्चर, कोरियन ड्रामा और के-पॉप से गहराई से प्रभावित थीं और कोरियन लड़कों से ही शादी करना चाहती थीं।
भारतीय लड़कों से शादी का दबाव बना वजह
सुसाइड नोट में बहनों ने आरोप लगाया है कि उनके माता-पिता उन्हें भारतीय लड़कों से शादी करने के लिए मजबूर करना चाहते थे, जो उन्हें स्वीकार नहीं था। उन्होंने लिखा कि शादी के नाम से ही उन्हें डर और तनाव महसूस होता था। उनका कहना था कि वे जिस संस्कृति और लोगों से प्यार करती थीं, उनसे उन्हें दूर किया जा रहा था।
डायरी में लिखा गया है, “हम कोरियन से प्यार करते थे और शादी इंडिया के आदमी से—यह हमें मंजूर नहीं था। मार और दबाव से बेहतर हमें मौत लगी।”
भाई को भी मान लिया दुश्मन
सुसाइड नोट में यह भी सामने आया है कि बहनों ने अपने छोटे भाई को भी दुश्मन मान लिया था। उन्होंने लिखा कि माता-पिता उनके भाई को कोरियन नाम और कल्चर से दूर रखना चाहते थे और उसे “बॉलीवुड” की पहचान दे रहे थे, जिससे वे नाराज थीं। इसी वजह से उन्होंने भाई से भावनात्मक दूरी बना ली थी।
पसंदीदा चीजों की लंबी सूची
डायरी में बहनों ने अपनी पसंदीदा चीजों की एक लंबी सूची भी लिखी है, जिसमें कोरियन एक्टर्स, के-पॉप ग्रुप्स, चाइनीज, थाई और जापानी ड्रामा, हॉलीवुड म्यूजिक, कार्टून कैरेक्टर्स और मोबाइल गेम्स तक शामिल हैं। उन्होंने लिखा कि ये सभी चीजें उनकी “जान” थीं और इन्हें उनसे छीना जा रहा था।
पुलिस जांच में जुटी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह मामला मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद की कमी और सांस्कृतिक टकराव से जुड़ा हो सकता है।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों और युवाओं की भावनाओं, मानसिक स्थिति और उनकी पसंद को समझना कितना जरूरी है।

