12 Feb 2026, Thu

निशिकांत दुबे की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़का विपक्ष हुआ लामबंद, मामला स्पीकर के पास पहुंचा

नई दिल्ली: लोकसभा में आज धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा किए गए बयानों ने सदन में जबरदस्त हंगामा मचा दिया। सांसद दुबे 6 किताबें लेकर सदन में आए और उन किताबों को उद्धृत करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

इस दौरान विपक्षी सांसदों ने आक्रोश जताया और हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसद इस मामले में स्पीकर ओम बिरला से मिलकर शिकायत करने के लिए आगे बढ़े। स्पीकर ने कहा कि लिखित शिकायत पेश की जाए ताकि इस पर आगे कार्रवाई की जा सके।

किस तरह शुरू हुआ हंगामा

सूत्रों के अनुसार, निशिकांत दुबे जब किताबों के हवाले से नेहरू और इंदिरा गांधी के बारे में बोल रहे थे, तब पीठासीन सदस्य कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने उन्हें रोकने की कोशिश की। हालांकि, दुबे ने लगातार बोलना जारी रखा। उनके आपत्तिजनक बयानों से विपक्षी सांसदों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।

इस हंगामे के चलते सदन की सक्रिय कार्रवाई को रोकना पड़ा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सांसद दुबे और नेता विपक्ष के लिए दो अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी नेताओं का कहना है कि सांसद द्वारा किए गए बयान लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं और ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार विपक्षी सांसदों ने स्पीकर से आग्रह किया कि सांसद दुबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

स्पीकर ने विपक्षी सांसदों से कहा कि वे लिखित में शिकायत पेश करें, जिसके आधार पर मामले की जांच और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक नतीजे

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने लोकसभा में राजनीतिक टकराव और विभाजन को और उजागर किया है। विपक्ष का आरोप है कि संसद में समान नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और कुछ सांसदों को विशेष छूट दी जा रही है।

इस मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि संसद में आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे घटनाक्रम संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय हैं।

निष्कर्ष

लोकसभा में निशिकांत दुबे की टिप्पणियों ने सदन में तनाव और राजनीतिक बहस को बढ़ा दिया है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में संसद में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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