रुपया 94 के पार: डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट, कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का दबाव
भारतीय मुद्रा रुपया लगातार दबाव में है और सोमवार को यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 50 पैसे की गिरावट के साथ 94.03 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब रुपया 94 के स्तर को पार कर गया है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।
इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपये में कमजोरी देखने को मिली थी। शुक्रवार को रुपया 64 पैसे टूटकर 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिससे यह 93 के स्तर के पार चला गया था। लगातार हो रही गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपये पर दबाव के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा मजबूत अमेरिकी डॉलर भी रुपये की कमजोरी को बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण अन्य मुद्राओं के मुकाबले रुपये पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। डॉलर इंडेक्स 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.78 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड वायदा 1.11 प्रतिशत गिरकर 113.4 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, लेकिन हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारत के आयात बिल को बढ़ाया है, जिससे चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ता है।
घरेलू शेयर बाजार भी इस दौरान कमजोरी के दौर से गुजर रहा है। BSE Sensex 1,836.57 अंक (2.46%) गिरकर 72,696.39 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 601.85 अंक (2.60%) टूटकर 22,512.65 पर आ गया। बाजार में आई इस भारी गिरावट का भी रुपये पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है। शुक्रवार को FIIs ने 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे रुपये पर बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी हाल के दिनों में घटा है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर घटकर 709.75 अरब डॉलर रह गया।
मुद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में रुपये की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर हस्तक्षेप करके रुपये को स्थिर रखने की कोशिश कर सकता है।
फिलहाल रुपये का दबाव में रहना जारी है और बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह गिरावट थमेगी या और गहराएगी।

