दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में मंगलवार को एक शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को दहला दिया। टोंगा द्वीप समूह के पास आए इस भूकंप की तीव्रता 7.6 मापी गई, जिससे समुद्र के भीतर हलचल मच गई और आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई।
सुबह के समय आया तेज झटका
संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण USGS के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 4:37 बजे आया। इसका केंद्र वावाउ द्वीप समूह में स्थित नेइआफाउ से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम में था।
भूकंप के झटके समुद्र के भीतर महसूस किए गए, जिससे क्षेत्र में रहने वाले लोगों और समुद्री गतिविधियों पर निर्भर समुदायों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया।
गहराई ज्यादा होने से टला बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक इस भूकंप की गहराई करीब 237 से 238 किलोमीटर थी, जो कि काफी अधिक मानी जाती है। गहराई ज्यादा होने की वजह से इसका प्रभाव सतह पर अपेक्षाकृत कम पड़ा और बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका टल गई।
Pacific Tsunami Warning Center ने भी स्पष्ट किया कि इस भूकंप के कारण सुनामी का कोई खतरा नहीं है। आमतौर पर गहरे भूकंपों से समुद्र की सतह पर बड़ी लहरें उत्पन्न नहीं होतीं, इसलिए राहत की बात यह रही कि तटीय इलाकों को सुरक्षित माना गया।
कोई जनहानि या नुकसान नहीं
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस भूकंप से किसी भी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इतने शक्तिशाली भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स (झटके) आने की संभावना बनी रहती है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
एक दिन पहले भी आया था भूकंप
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी टोंगा के हिहिफो क्षेत्र के पास 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। लगातार दो दिनों में आए इन झटकों ने वैज्ञानिकों का ध्यान इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों की ओर खींचा है।
क्यों आता है इस क्षेत्र में भूकंप?
टोंगा “रिंग ऑफ फायर” नामक क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यहां टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराने और खिसकने के कारण अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां होती रहती हैं।
निष्कर्ष
7.6 तीव्रता का यह भूकंप भले ही बेहद शक्तिशाली था, लेकिन इसकी अधिक गहराई के कारण बड़ा खतरा टल गया। टोंगा और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह एक चेतावनी जरूर है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हमेशा तैयार रहना जरूरी है। फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन वैज्ञानिक और प्रशासनिक एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

