काठमांडू: दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत देते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने लगभग छह महीने बाद अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है। इस संदेश में भारत और नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया गया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई गई है। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए संदेश में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी के स्नेहपूर्ण शब्दों और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। साथ ही यह भी कहा गया कि नेपाल भारत के साथ अपने बहुआयामी संबंधों को नई दिशा देने और दोनों देशों के नागरिकों की समृद्धि के लिए मिलकर काम करने को उत्सुक है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से संवाद अपेक्षाकृत कम नजर आ रहा था।
दरअसल, यह संदेश नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के कार्यभार संभालने के बाद आया है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेंद्र शाह को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी थी और भारत-नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई थी। मोदी ने अपने संदेश में कहा था कि भारत और नेपाल के बीच दोस्ती, सहयोग और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए वह मिलकर काम करने को तैयार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की ओर से छह महीने बाद आया यह संदेश सिर्फ औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सक्रियता के फिर से बढ़ने का संकेत भी हो सकता है। भारत और नेपाल के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से काफी गहरे रहे हैं। खुली सीमा, व्यापारिक साझेदारी और लोगों के बीच मजबूत संपर्क इन संबंधों की नींव हैं।
पिछले कुछ समय में क्षेत्रीय और आंतरिक राजनीतिक कारणों की वजह से दोनों देशों के बीच संवाद की गति धीमी पड़ी थी। ऐसे में नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की यह पहल रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। यह भी संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठकों और समझौतों का सिलसिला तेज हो सकता है।
आर्थिक दृष्टि से भी भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में कूटनीतिक स्तर पर बढ़ती गर्मजोशी इन परियोजनाओं को और गति दे सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और नेपाल के रिश्तों का मजबूत होना दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। खासकर चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत-नेपाल सहयोग को नए आयाम देने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय का यह ताजा संदेश दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत देता है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक सकारात्मकता किस तरह ठोस नीतिगत फैसलों और साझेदारी में बदलती है।

