हुमायूं कबीर का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, वायरल वीडियो विवाद के बीच राजनीतिक घमासान तेज
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सामने आए एक वायरल वीडियो ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है, जिसमें हुमायूं कबीर कथित तौर पर पैसों के लेन-देन और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर बयान देते नजर आ रहे हैं।
वायरल वीडियो से मचा बवाल
टीएमसी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो के सामने आने के बाद हुमायूं कबीर की छवि पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में कथित रूप से उनके कई राजनीतिक दावों और संपर्कों का जिक्र किया गया है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
हुमायूं कबीर का पलटवार
इस्लामपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि यह वीडियो उनके पार्टी गठन से पहले का है और इसे जानबूझकर अब वायरल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा, “19 दिसंबर का वीडियो 8 अप्रैल को वायरल किया गया है। अगर यह वीडियो पहले से मौजूद था तो इसे पहले क्यों नहीं दिखाया गया?” हुमायूं कबीर ने दावा किया कि वह इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का रुख करेंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगी बीजेपी और आरएसएस के साथ मिलकर उनके खिलाफ राजनीतिक रणनीति बना रहे हैं।
फिरहाद हकीम का जवाबी हमला
टीएमसी नेता और मंत्री फिरहाद हकीम ने हुमायूं कबीर के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने जनता और अपने समर्थकों को धोखा दिया है। हकीम ने दावा किया कि वायरल वीडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं है और हुमायूं कबीर अब अपनी स्थिति बचाने के लिए इसे एआई जनरेटेड बता रहे हैं।
टीएमसी नेताओं ने भी हुमायूं कबीर पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने बीजेपी के समर्थन से अलग राजनीतिक पार्टी बनाकर तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है।
राजनीतिक आरोपों का दौर तेज
टीएमसी की ओर से आरोप लगाया गया है कि हुमायूं कबीर के बीजेपी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ संबंधों की जांच की जानी चाहिए। पार्टी ने यहां तक मांग की है कि इस पूरे मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराई जाए।
टीएमसी का कहना है कि यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
विपक्ष और सियासी तनाव
इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। एक तरफ हुमायूं कबीर खुद को निर्दोष बताते हुए कानूनी लड़ाई की बात कर रहे हैं, वहीं टीएमसी और उसके नेता उन पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो विवाद के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2026 नजदीक आ रहे हैं, राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भी बढ़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि यह मामला कानूनी मोड़ लेता है या राजनीतिक मंच पर ही सुलझता है।

