1 Aug 2026, Sat

13 राज्यों में शुरू होंगे 2442 किमी लंबे 54 हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स, यहां देखें लिस्ट

देश के सड़क बुनियादी ढांचे को नई गति देने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने चालू वित्त वर्ष में 2,442 किलोमीटर लंबे 54 हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के लिए बोली (टेंडर) आमंत्रित करने की योजना बनाई है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये है। सरकार का मानना है कि ये प्रोजेक्ट्स देश की कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

NHAI के दस्तावेज के अनुसार, प्रस्तावित 54 हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना में विकसित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से इन राज्यों में यात्रा का समय कम होगा, माल परिवहन तेज होगा और औद्योगिक तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, यह योजना पिछले वर्ष की तुलना में छोटी है। NHAI ने 2025-26 के लिए 6,376 किलोमीटर लंबे 124 प्रोजेक्ट्स की पहचान की थी, जिनकी अनुमानित लागत 3,45,466 करोड़ रुपये थी। इसके मुकाबले इस बार परियोजनाओं की संख्या और लंबाई दोनों कम हैं, लेकिन सरकार का फोकस रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर है।

प्रस्तावित परियोजनाओं में 26 प्रोजेक्ट्स इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड, 21 प्रोजेक्ट्स हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) और 7 प्रोजेक्ट्स बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत विकसित किए जाएंगे। इन तीनों मॉडल के जरिए सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी और समयबद्ध निर्माण को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

NHAI, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत देश में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की सबसे बड़ी एजेंसी है। वर्तमान में देश के कुल राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में इसकी हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत के बीच है। शेष निर्माण कार्य नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NHIDCL), बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) और राज्य लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किया जाता है।

भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मुख्य रूप से BOT, HAM और EPC मॉडल के जरिए पूरा किया जाता है। BOT मॉडल में निजी कंपनी सड़क का निर्माण, संचालन और रखरखाव करती है और रियायती अवधि सामान्यतः 15 से 20 वर्ष होती है। HAM मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र दोनों निवेश करते हैं, जबकि EPC मॉडल में निर्माण की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है और परियोजना पूरी होने के बाद उसका संचालन सरकार के अधीन रहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन 54 नई परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, रोजगार सृजन, औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, एक्सप्रेसवे और आधुनिक हाईवे नेटवर्क के विस्तार से देश की परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। आने वाले वर्षों में ये परियोजनाएं भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आर्थिक वृद्धि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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