24 Jun 2026, Wed

10 साल से अपनी पेंशन के पैसे से बंदरों का पेट भर रहीं 76 वर्षीय महिला, Video सामने आते ही यूजर्स करने लगे तारीफ

आज के दौर में जहां लोग अपनी जरूरतों और सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं, वहीं तमिलनाडु के मदुरै की एक 76 वर्षीय महिला अपनी करुणा और सेवा भावना से लोगों का दिल जीत रही हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बुजुर्ग महिला सैकड़ों बंदरों को खाना खिलाती नजर आ रही हैं। यह वीडियो न केवल लोगों को भावुक कर रहा है, बल्कि पशुओं के प्रति दया और प्रेम का भी एक प्रेरणादायक संदेश दे रहा है।

मदुरै की रहने वाली मालथी पिछले एक दशक से अधिक समय से बंदरों की देखभाल कर रही हैं। खास बात यह है कि वह अपनी पेंशन की राशि का बड़ा हिस्सा इन बेजुबान जानवरों को भोजन कराने में खर्च करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मालथी वर्ष 2015 से तिरुप्पारनकुंड्रम क्षेत्र के आसपास रहने वाले बंदरों को नियमित रूप से खाना खिला रही हैं।

बताया जाता है कि हर शनिवार मालथी कई स्थानों पर जाती हैं और जैसे ही वह बंदरों को आवाज लगाती हैं, सैकड़ों बंदर उनके आसपास इकट्ठा हो जाते हैं। अनुमान के मुताबिक, लगभग 350 से 400 बंदर उनके बुलाने पर पहुंच जाते हैं। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद मालथी ने अपनी इस सेवा को कभी नहीं रोका।

मालथी का जीवन सेवा और समर्पण का उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन में भी समाज की सेवा की है। उन्होंने गांधीग्राम विश्वविद्यालय में शारीरिक शिक्षा निदेशक के रूप में कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने कोडाइकनाल के एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल में भी अपनी सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने तमिलनाडु पुलिस विभाग में 33 वर्षों तक कार्य किया और वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुईं।

सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश लोग आरामदायक जीवन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन मालथी ने अपना समय और संसाधन बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनकी यह पहल समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं के प्रति प्रेम और उनकी देखभाल न केवल जानवरों के लिए लाभकारी होती है, बल्कि इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, जानवरों के साथ समय बिताने से शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिसे “लव हार्मोन” भी कहा जाता है। वहीं, तनाव पैदा करने वाले कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर कम होता है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पशुओं के साथ समय बिताने से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। इसके अलावा, जानवर अकेलेपन की भावना को कम करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करते हैं।

पशु प्रेमियों के लिए जानवर केवल पालतू या जीव मात्र नहीं होते, बल्कि परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। उनकी निष्ठा, स्नेह और साथ कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। मालथी की कहानी इसी मानवीय संवेदना का एक जीवंत उदाहरण है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं। यूजर्स मालथी की दयालुता और समर्पण की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें “रियल हीरो” और “मानवता की मिसाल” बताया है।

मालथी की यह अनूठी पहल यह साबित करती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी समाज और जीव-जंतुओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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