ईरान-अमेरिका सीजफायर पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद, लेबनान में इजरायली हमले जारी
पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। Iran और United States के बीच हाल ही में घोषित दो हफ्तों का सीजफायर अब खतरे में पड़ गया है। इसकी वजह Lebanon में Hezbollah के ठिकानों पर Israel के लगातार हमले हैं, जिनके बाद ईरान ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए Strait of Hormuz को ब्लॉक करने का फैसला किया है।
ईरान की सरकारी मीडिया Islamic Republic News Agency के अनुसार, तेहरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही रोक दी है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है।
इस घटनाक्रम के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि हिजबुल्लाह इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं था। उनका कहना है कि यह समझौता केवल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए किया गया था, न कि क्षेत्र के अन्य संघर्षों को रोकने के लिए।
उधर, इजरायल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। Israel Defense Forces ने पुष्टि की है कि उसने “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के तहत अब तक का सबसे बड़ा समन्वित हमला किया है। इस ऑपरेशन में बेरूत, बेका वैली और दक्षिणी लेबनान के इलाकों में 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन ठिकानों में हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर, मिसाइल लॉन्च साइट्स और इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर शामिल बताए जा रहे हैं।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में अब तक कम से कम 112 लोगों की मौत हो चुकी है और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे मानवीय संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
इजरायली सेना के वरिष्ठ अधिकारी Eyal Zamir ने कहा कि ये हमले सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए हैं और इसका उद्देश्य हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को खत्म करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इसी बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक हिजबुल्लाह से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल अमेरिका के उस फैसले का समर्थन करता है, जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को दो हफ्तों के लिए टालने की बात कही गई है—बशर्ते ईरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे और क्षेत्र में सभी हमले रोक दे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा और ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। वहीं, लेबनान में जारी संघर्ष सीजफायर की सफलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशें अभी नाजुक स्थिति में हैं, और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह पूरी तरह से क्षेत्रीय शक्तियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

