12 Mar 2026, Thu

हरीश राणा की ‘इच्छामृत्यु’ जैसी ही है 16 साल पुरानी फिल्म, दो सुपरस्टार ने फूंकी जान, क्लाइमेक्स देख छलक पड़ेंगे आंसू

हरीश राणा इच्छामृत्यु केस: सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दिलाई ‘गुजारिश’ फिल्म की याद

नई दिल्ली: इच्छामृत्यु (Mercy Killing) को लेकर देश में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इसकी वजह बना है गाजियाबाद के युवक हरीश राणा का मामला, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की अनुमति दे दी है। करीब 13 साल से कोमा जैसी अवस्था में जीवन बिता रहे हरीश राणा के माता-पिता ने अदालत से अपने बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई थी। कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

इस घटना ने कई लोगों को बॉलीवुड की चर्चित फिल्म Guzaarish की याद दिला दी है, जिसमें इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दे को बड़े भावुक अंदाज में दिखाया गया था।

कैसे हुआ हादसा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले थे और चंडीगढ़ में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। अगस्त 2013 में एक दर्दनाक हादसे में वह अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद वह वेजिटेटिव स्टेट में चले गए।

वेजिटेटिव स्टेट वह स्थिति होती है जिसमें शरीर जीवित रहता है लेकिन मस्तिष्क सामान्य रूप से काम नहीं करता। हादसे से पहले हरीश एक होनहार छात्र थे और फिटनेस के काफी शौकीन थे। उन्हें जिम जाना और प्रतियोगिताओं में भाग लेना पसंद था। लेकिन उस एक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

करीब 13 साल तक उनके माता-पिता ने बेटे के ठीक होने की उम्मीद में इलाज कराया और उसकी देखभाल की। लेकिन जब लंबे समय तक कोई सुधार नहीं हुआ, तो अंततः उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई के बाद Supreme Court of India ने मानवीय आधार पर हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दे दी। अदालत ने All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) दिल्ली को निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया बेहद सावधानी और सम्मान के साथ की जाए।

कोर्ट ने कहा कि मरीज की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यह फैसला उन माता-पिता के लिए बेहद भावनात्मक रहा, जिन्होंने वर्षों तक अपने बेटे के ठीक होने की उम्मीद में संघर्ष किया।

फिल्म ‘गुजारिश’ से मिलता-जुलता विषय

हरीश राणा का मामला लोगों को 2010 में आई फिल्म Guzaarish की याद दिला रहा है। इस फिल्म का निर्देशन Sanjay Leela Bhansali ने किया था। फिल्म में Hrithik Roshan ने ईथन मस्करेन्हा नाम के जादूगर का किरदार निभाया था, जो एक हादसे के बाद पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाता है।

फिल्म में उनकी देखभाल उनकी नर्स सोफिया करती है, जिसका किरदार Aishwarya Rai Bachchan ने निभाया था। लंबे समय तक दर्द और असहाय जीवन जीने के बाद ईथन अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगता है।

फिल्म को लेकर हुआ था विवाद

जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। कुछ लोगों का मानना था कि उस समय भारत में इच्छामृत्यु कानूनी नहीं थी, इसलिए ऐसी कहानी समाज में गलत संदेश दे सकती है। हालांकि फिल्म ने दर्शकों को एक गंभीर और संवेदनशील विषय पर सोचने के लिए मजबूर किया।

समाज में फिर शुरू हुई बहस

हरीश राणा के मामले के बाद एक बार फिर इच्छामृत्यु को लेकर कानूनी और नैतिक बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे मानवीय फैसला मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे संवेदनशील और जटिल मुद्दा बता रहे हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन परिवारों के दर्द और संघर्ष को सामने लाता है, जिन्हें वर्षों तक अपने प्रियजनों को असहाय स्थिति में देखना पड़ता है।

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