24 Feb 2026, Tue

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज पक्सो एक्ट के मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर पॉक्सो केस: यूपी कांग्रेस ने पीएम को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों के बीच बहस तेज हो गई है।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। अजय राय ने पत्र में लिखा है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से कराई जानी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बने और राजनीतिक दबाव या किसी सियासी रंजिश का आरोप न लगे।

अजय राय ने कहा कि यह मामला तब दर्ज किया गया, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कुंभ मेले की अव्यवस्थाओं और अन्य प्रशासनिक खामियों पर प्रदेश सरकार को घेरा था। उनका कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध के तहत हो सकती है।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाली धार्मिक स्वतंत्रता और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा, “किसी भी आध्यात्मिक पद की गरिमा को सियासी रंजिश का हथियार बनाना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है। हम मांग करते हैं कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और सत्ता के हंटर से संतों की आवाज दबाने की कोशिश बंद हो।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोप ने समाज में विवाद और बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग मामले की गंभीरता पर ध्यान देने की बात कह रहे हैं, वहीं कई लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश मान रहे हैं। अजय राय के इस पत्र के बाद यह मामला अब केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की निगरानी में आया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सतर्क और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि न तो आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन हो और न ही पीड़ित को न्याय मिल सके। यूपी कांग्रेस की मांग है कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।

राजनीतिक और धार्मिक प्रतिष्ठा दोनों ही इस मामले में जुड़े हैं। इसलिए जनता और मीडिया दोनों ही इस केस पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। आगामी समय में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और रिपोर्ट इस विवाद को और स्पष्ट करेगी।

इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धर्म और प्रशासनिक मामलों पर कई सार्वजनिक बयान दिए थे, जिन्हें लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही है। अब इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि आरोप वैध हैं या राजनीतिक दबाव का हिस्सा।

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