पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राज्य सरकार की “शिक्षा क्रांति” के चार सालों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया। चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में इतना मजबूत बनेगा कि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से विद्यार्थी बेहतर शिक्षा के लिए यहां आएंगे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों और उपलब्धियों को साझा किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए बड़े स्तर पर निवेश किया है। वर्ष 2021-22 में शिक्षा बजट जहां 12,657 करोड़ रुपये था, वहीं इसे 2026-27 में बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि सरकार की शिक्षा के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर लाना और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है।
रिपोर्ट कार्ड में सरकार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में ढांचागत सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप पंजाब के सरकारी स्कूलों के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि राज्य के छात्रों ने राष्ट्रीय औसत से 18 प्रतिशत अधिक अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा, 740 विद्यार्थियों ने जेईई और 1,284 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पिछले चार वर्षों में राज्य में एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है, जो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का संकेत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भर्ती और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। अप्रैल 2022 से अब तक 14,525 शिक्षकों की भर्ती की गई है, जबकि हजारों कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया गया है। साथ ही, शिक्षकों को सिंगापुर, फिनलैंड और अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है ताकि वे आधुनिक शिक्षा प्रणाली से सीख सकें।
सरकार ने “स्कूल ऑफ एमिनेंस” की स्थापना पर भी जोर दिया है। अब तक 118 ऐसे स्कूलों की योजना बनाई गई है, जिनमें से 60 पहले ही शुरू हो चुके हैं। इन स्कूलों में छात्रों को आधुनिक शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मुफ्त यूनिफॉर्म, बस सेवा और कोचिंग की सुविधा भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने “बिजनेस ब्लास्टर स्कीम” का उल्लेख करते हुए बताया कि यह योजना छात्रों में उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इस पहल के तहत छात्रों ने मिलकर लगभग 70 करोड़ रुपये की कमाई की है। इसके अलावा, पंजाब पहला राज्य बन गया है जहां 11वीं कक्षा में उद्यमिता को एक विषय के रूप में शामिल किया गया है।
शिक्षा के साथ-साथ सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया है। सरकारी स्कूलों में हाई-स्पीड फाइबर वाई-फाई, नई कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, खेल के मैदान और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुरक्षा और रखरखाव के लिए हजारों कैंपस मैनेजर, सुरक्षा गार्ड और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं, जिसमें डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति और नए कॉलेजों की स्थापना शामिल है। इसके साथ ही पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कामकाज में इसे 100 प्रतिशत अनिवार्य बनाया गया है और कई किताबों का डिजिटलीकरण भी किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में एक मॉडल राज्य बने। उन्होंने भरोसा जताया कि इन सुधारों के माध्यम से पंजाब जल्द ही शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाएगा।

