6 Apr 2026, Mon

व्यक्ति कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता…’, भाजपा के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम में बोले नितिन गडकरी

नितिन गडकरी का बड़ा बयान: “व्यक्ति कभी पूरी तरह सेक्युलर नहीं हो सकता”

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार और राज्य तो सेक्युलर हो सकते हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता।


सेक्युलरिज्म पर गडकरी की राय

गडकरी ने अपने भाषण में कहा कि सेक्युलरिज्म का वास्तविक अर्थ “सर्वधर्म सद्भाव” है, न कि केवल धर्म से दूरी बनाना। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का किसी न किसी धर्म, संस्कृति और आस्था से जुड़ाव होता है, इसलिए पूरी तरह सेक्युलर होना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी धर्मों और विचारों का सम्मान करना ही सच्ची धर्मनिरपेक्षता है। उनके अनुसार, सेक्युलर शब्द को कई बार गलत तरीके से समझा और प्रस्तुत किया जाता है।


अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब एक बार वाजपेयी से पूछा गया कि क्या बीजेपी के सत्ता में आने से सेक्युलरिज्म खत्म हो जाएगा या मुसलमानों के साथ भेदभाव होगा, तो उन्होंने कहा था कि भारत एक सेक्युलर देश है और हमेशा रहेगा।

गडकरी ने कहा कि यह भारत की संस्कृति और हिंदू समाज की समावेशी सोच के कारण संभव है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी की वजह से।


हिंदू संस्कृति और सर्वधर्म समभाव

गडकरी ने कहा कि हिंदू धर्म को केवल एक धर्म या पंथ के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही सभी धर्मों के प्रति सम्मान और समावेशिता रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के शासन के दौरान समाज में कुछ गलत धारणाएं फैल गईं, जिनके कारण लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ।


सरकार और व्यक्ति में अंतर

गडकरी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि एक सरकार या शासक का सेक्युलर होना जरूरी है, लेकिन व्यक्ति का पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष होना संभव नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi और Indira Gandhi का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी मृत्यु के बाद पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया था, जो यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने धर्म से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता।


भारतीय संस्कृति पर जोर

गडकरी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा “वसुधैव कुटुंबकम” की है, यानी पूरा विश्व एक परिवार है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा “सबका साथ, सबका विकास” और “विश्व कल्याण” की भावना के साथ काम करती है। यह विचार भारतीय संस्कृति की गहराई और व्यापकता को दर्शाता है।


निष्कर्ष

नितिन गडकरी के इस बयान ने एक बार फिर सेक्युलरिज्म और धर्म को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उन्होंने सर्वधर्म समभाव और सभी धर्मों के सम्मान की बात कही, वहीं दूसरी ओर उनके बयान ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या व्यक्ति वास्तव में पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष हो सकता है या नहीं।

यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बना रह सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *