नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे और सत्ता पक्ष–विपक्ष के बीच बढ़ती तकरार के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में औपचारिक नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा जा सकता है।
बजट सत्र की शुरुआत से ही हंगामा
बजट सत्र की शुरुआत से ही संसद का माहौल काफी तनावपूर्ण रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान से ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कई दिनों तक सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और बार-बार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का आरोप है कि सदन में उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ता पक्ष को प्राथमिकता मिल रही है।
स्पीकर पर भेदभाव के आरोप
विपक्षी दल लगातार लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर सदन का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे और विपक्षी सांसदों को बोलने से रोका जा रहा है। इन्हीं आरोपों के चलते अब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा तेज हो गई है।
विपक्षी नेताओं की अहम बैठक
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में बजट सत्र के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति और स्पीकर के खिलाफ संभावित कदमों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल इस बात पर सहमत हैं कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री का जवाब भी अधूरा
बजट सत्र में बढ़े हंगामे का असर इतना ज्यादा रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब भी पूरा नहीं दे पाए। विपक्षी सांसदों, खासकर कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा वेल में आकर नारेबाजी करने के कारण प्रधानमंत्री को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा। यह घटनाक्रम सत्ता पक्ष के लिए भी असहज स्थिति बन गया।
नोटिस सौंपने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल जल्द ही लोकसभा महासचिव को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप सकते हैं। हालांकि, संख्या बल के लिहाज से यह प्रस्ताव पारित होना मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे सरकार और स्पीकर के खिलाफ दबाव बनाने के एक बड़े राजनीतिक कदम के तौर पर देख रहा है।
आगे क्या?
अगर विपक्ष वास्तव में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो यह संसदीय इतिहास में एक अहम और असामान्य कदम माना जाएगा। इससे संसद का माहौल और ज्यादा गरमा सकता है और आने वाले दिनों में बजट सत्र के सुचारू संचालन पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विपक्ष कब औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश करता है और सत्ता पक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

