13 Apr 2026, Mon

‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में लालू यादव को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका ठुकराई

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav को ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज सीबीआई की एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में मेरिट के आधार पर होगी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने साफ कहा कि इस मामले को खारिज करने का कोई आधार नहीं बनता है। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए यह भी कहा कि लालू यादव को हर सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से निचली अदालत में पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह इस मामले की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर सुनवाई करे।

दरअसल, Central Bureau of Investigation (CBI) ने इस मामले में 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियों, कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला उस समय का है जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान Indian Railways के पश्चिम मध्य रेलवे जोन में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां कथित तौर पर उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने बदले में लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम पर जमीन ट्रांसफर की थी। यह मामला खास तौर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर क्षेत्र से जुड़ा बताया जाता है।

लालू यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई थी कि सीबीआई की एफआईआर और जांच प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध नहीं है, क्योंकि जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने इसी आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस स्तर पर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच ट्रायल कोर्ट में ही की जानी चाहिए।

इस फैसले को लालू यादव और उनके परिवार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें इस मामले का सामना निचली अदालत में करना होगा। वहीं, राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि वह ऐसे मामलों में विस्तृत जांच और सुनवाई को प्राथमिकता देता है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रायल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या निष्कर्ष निकलते हैं।

फिलहाल, यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े नए घटनाक्रम सामने आने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *