रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग शौचालय पर ताला, वीडियो वायरल; व्यवस्था पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक रेलवे स्टेशन पर बने दिव्यांग शौचालय की स्थिति को दिखाया गया है। वीडियो में साफ नजर आता है कि शौचालय के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है और बाहर एक नोटिस चिपका है—“दिव्यांग शौचालय की चाबी डिप्टी एस.एस. के पास है।” इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वीडियो बनाने वाले शख्स ने पूछा कि अगर किसी दिव्यांग व्यक्ति को तुरंत शौचालय की जरूरत पड़े तो क्या वह पहले डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट के पास चाबी लेने जाएगा?
यही सवाल अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया है। वीडियो देखने वाले लोग इसे अव्यवहारिक और संवेदनहीन व्यवस्था बता रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि दिव्यांगजनों के लिए बनाई गई सुविधा का असली मकसद तभी पूरा होगा जब वह आसानी से और तुरंत उपलब्ध हो।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि रेलवे स्टेशन परिसर में दिव्यांगजनों के लिए अलग से शौचालय बनाया गया है, लेकिन उसके दरवाजे पर ताला लटका हुआ है। बाहर लगे कागज पर लिखा है कि इसकी चाबी डिप्टी एस.एस. (डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट) के पास है। वीडियो में मौजूद व्यक्ति कैमरे के सामने सवाल करता है कि अगर किसी व्हीलचेयर उपयोग करने वाले या अन्य दिव्यांग व्यक्ति को तत्काल शौचालय की जरूरत हो तो क्या वह पहले संबंधित अधिकारी को ढूंढेगा, उनसे चाबी लेगा और फिर वापस आकर शौचालय का उपयोग करेगा?
वीडियो का लहजा व्यंग्यात्मक है, लेकिन मुद्दा गंभीर है। व्यक्ति यह भी कहता है कि जो व्यक्ति देख नहीं सकता, वह इस सूचना को पढ़ेगा कैसे? ऐसे में यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं लगती।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
वीडियो को इंस्टाग्राम पर “kanpur_ka_ghumakkad_launda” नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। खबर लिखे जाने तक इसे 21 हजार से अधिक लाइक मिल चुके हैं और कमेंट सेक्शन में लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
एक यूजर ने लिखा, “सही सवाल भाई का।” दूसरे ने तंज कसते हुए कहा, “यहां के रेलवे वाले क्या फूंक कर बैठे हैं?” तीसरे यूजर ने सवाल उठाया, “अगर डिप्टी एस.एस. छुट्टी पर चले गए तो क्या होगा?” वहीं एक अन्य ने लिखा, “एक दिन पहले बुक करना पड़ेगा क्या?” एक कमेंट में यह भी पूछा गया कि जो व्यक्ति पढ़ नहीं सकता या देख नहीं सकता, वह इस नोटिस को कैसे समझेगा?
व्यवस्था पर बड़े सवाल
दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन यदि वही सुविधा ताले में बंद हो और उसकी चाबी किसी अधिकारी के पास हो, तो यह व्यवस्था के उद्देश्य पर सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सुविधाएं 24 घंटे खुली और सुलभ होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
यह वीडियो केवल एक स्टेशन का मामला नहीं, बल्कि व्यापक सोच और क्रियान्वयन पर चर्चा का कारण बन गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस पर क्या संज्ञान लेता है और क्या भविष्य में ऐसी व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।

