लोकसभा में गरमाई बहस: राहुल गांधी और रविशंकर प्रसाद आमने-सामने, पीएम मोदी को लेकर तीखा विवाद 🔥
लोकसभा में बुधवार को उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव हो गया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi और बीजेपी के वरिष्ठ सांसद Ravi Shankar Prasad के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
दरअसल, लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद रविशंकर प्रसाद ने तुरंत खड़े होकर राहुल गांधी के बयान का कड़ा विरोध किया और उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप
बहस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कई बार संसद में बोलने से रोका गया है। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री से जुड़े कुछ मुद्दे उठाने की कोशिश की तो उन्हें बीच में ही रोक दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane की किताब से जुड़े मुद्दे और कुछ अन्य मामलों का जिक्र करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री के ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ होने का मुद्दा उठाया, नरवणे की किताब का मुद्दा उठाया और कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों का जिक्र किया, लेकिन मुझे चुप करा दिया गया।”
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।
रविशंकर प्रसाद का पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस तरह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष को याद दिलाना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं हो सकते।”
रविशंकर प्रसाद ने यह भी सवाल उठाया कि पॉइंट ऑफ ऑर्डर के दौरान इस तरह की बहस की अनुमति नहीं होती है, इसलिए राहुल गांधी को प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भी उठे सवाल
रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही का इस्तेमाल किसी नेता के व्यक्तिगत अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है वह अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है, ऐसे में उसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की एक अप्रकाशित किताब के अंशों का हवाला देने की कोशिश की थी।
इस पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि किसी अप्रकाशित किताब का संदर्भ देना उचित नहीं है क्योंकि उसकी प्रमाणिकता साबित नहीं की जा सकती।
इस विवाद के बाद कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव का समर्थन विपक्ष के 50 से ज्यादा सांसदों ने किया और कुल 118 विपक्षी सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
10 घंटे की बहस तय
जब यह प्रस्ताव पेश किया गया, उस समय सदन की अध्यक्षता भाजपा सांसद Jagadambika Pal कर रहे थे। उन्होंने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति देते हुए करीब 10 घंटे की बहस का समय तय किया।
संसद में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

