राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर, 12 विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में ठहराया
राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है। पार्टी ने संभावित राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है और अपने 12 विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये सभी विधायक देर रात Bengaluru पहुंचे और उन्हें शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इन विधायकों को बाहरी संपर्क से काफी हद तक दूर रखा गया है। रिसॉर्ट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कोई क्रॉस वोटिंग न हो और सभी विधायक पार्टी लाइन के अनुसार मतदान करें।
16 मार्च को मतदान, सीधे भुवनेश्वर ले जाने की तैयारी
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इन विधायकों को मतदान के दिन यानी 16 मार्च को सीधे रिसॉर्ट से Bhubaneswar ले जाने की योजना बनाई गई है। इसके जरिए पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतदान से पहले किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि या संपर्क से विधायकों पर असर न पड़े।
राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे कई बार राजनीतिक समीकरण अचानक बदल जाते हैं। इसी वजह से विभिन्न दल अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थानों पर रखने की रणनीति अपनाते हैं।
डीके शिवकुमार का बयान
इस पूरे मामले पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी विधायक को व्यक्तिगत रूप से नहीं बुलाया है।
शिवकुमार ने कहा, “मुझे जानकारी दी गई है कि कुछ विधायक यहां आए हुए हैं। वहां के पीसीसी अध्यक्ष ने मुझे फोन कर बताया कि उनके लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। हो सकता है कि वे बेंगलुरु और मैसुरु घूमने आए हों। पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका पालन करना हमारा काम है।”
उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा की कार्यवाही पूरी होने के बाद वह इन विधायकों से मुलाकात करेंगे। हालांकि उन्होंने इस बात पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा कि यह कदम क्रॉस वोटिंग के डर से उठाया गया है।
राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सतर्कता
राज्यसभा चुनाव के दौरान अक्सर राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए कई रणनीतियां अपनाते हैं। कई बार उन्हें रिसॉर्ट या होटल में एक साथ ठहराया जाता है ताकि विपक्षी दल उनसे संपर्क न कर सकें।
कांग्रेस का यह कदम भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता से बचना चाहता है, क्योंकि राज्यसभा की सीटों का गणित अक्सर विधायकों के वोटों पर ही निर्भर करता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इस कदम को कांग्रेस की अंदरूनी चिंता बता रहे हैं, जबकि पार्टी के नेता इसे सामान्य रणनीतिक तैयारी बता रहे हैं।
फिलहाल सभी की नजरें 16 मार्च को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। उस दिन यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है और क्या पार्टी अपने विधायकों के वोट सुरक्षित रखने में सफल रहती है।

